महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन बिल पास करवाना चाहती थी सरकार: तनुज पुनिया


लखनऊ, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने प्रधानमंत्री के संबोधन और महिला आरक्षण मुद्दे पर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर जनता को भ्रमित कर रही है और असल मुद्दों को अलग दिशा में ले जाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन बिल पास करवाना चाहती थी।

तनुज पुनिया ने कहा कि महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर भाजपा लगातार गलत बातें फैला रही है। उनके अनुसार यह सिर्फ महिला आरक्षण का मुद्दा नहीं था, बल्कि इसमें परिसीमन और जनगणना से जुड़े कई तकनीकी पहलू भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बिना सही जनगणना और सही प्रक्रिया के परिसीमन करना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि 2023 में महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद में सहमति बन गई थी और विपक्ष ने भी इसका समर्थन किया था। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल हमेशा से महिला आरक्षण के पक्ष में रहे हैं और अगर सरकार सही तरीके से इसे लागू करती है तो विपक्ष पूरा समर्थन देने को तैयार है।

तनुज पुनिया ने सवाल उठाया कि अगर सरकार की मंशा साफ है तो फिर जनगणना और परिसीमन में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने कहा कि पुरानी जनगणना 2011 की है, जो अब बहुत पुरानी हो चुकी है। ऐसे में नए आंकड़ों के बिना परिसीमन करना सही नहीं होगा। उनका कहना है कि सरकार को पहले पारदर्शी तरीके से जनगणना करानी चाहिए, उसके बाद ही सीटों के पुनर्निर्धारण पर बात होनी चाहिए। अगर फिर भी सरकार चाहती है तो मौजूदा 543 सीटों में से 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करे। विपक्ष भी इसे पूरा समर्थन देगी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण को राजनीतिक लाभ के नजरिए से देख रही है। उनके अनुसार, सरकार जल्दबाजी में ऐसे फैसले ले रही है जिनका उद्देश्य आने वाले चुनावों में राजनीतिक फायदा उठाना है। उन्होंने कहा कि जनता अब इन बातों को समझने लगी है और वह भ्रमित नहीं होगी।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह चाहता है कि यह प्रक्रिया संविधान और सही आंकड़ों के आधार पर हो। उन्होंने दोहराया कि अगर सरकार सच में महिला सशक्तिकरण चाहती है तो उसे सभी दलों को विश्वास में लेकर पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि संसद में महिला आरक्षण को लेकर जो चर्चा हुई थी, उसमें संविधान की भावना के अनुसार निर्णय लेने की बात थी, लेकिन सरकार इस मुद्दे को अलग दिशा में ले जाकर राजनीतिक बहस बना रही है।

–आईएएनएस

पीआईएम/वीसी


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