केदारनाथ डोली यात्रा शुरू, हजारों लोग हिमालयी तीर्थस्थल की पवित्र यात्रा में शामिल हुए


नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। रविवार को उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर से भगवान केदारनाथ की पारंपरिक डोली (पालकी) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जो हिमालय में स्थित पूजनीय केदारनाथ धाम की उनकी वार्षिक यात्रा का प्रारंभ है।

उखीमठ स्थित अपने शीतकालीन निवास पर विराजमान भगवान केदारनाथ की पंचमुखी प्रतिमा को वैदिक मंत्रों, भक्ति गीतों और भक्तों की उत्साहपूर्ण भागीदारी के बीच एक भव्य जुलूस में ले जाया गया। मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया था, जिसमें लगभग 8 क्विंटल विभिन्न प्रकार के फूलों का उपयोग किया गया था, जिससे एक आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण हुआ। भक्तों ने उत्सव के हिस्से के रूप में सामुदायिक भोज (भंडारा) का आयोजन भी किया।

आईएएनएस से ​​बात करते हुए अनुष्ठानों से जुड़े एक पुजारी ने कहा कि यह हिमालय की एक दिव्य परंपरा है, जो सदियों से चली आ रही है। इस क्षेत्र में महादेव पूजा की गहरी संस्कृति है। तीन दिन बाद, 22 अप्रैल को भगवान शिव के शुभ द्वार खुलेंगे। डोली के रूप में बनी यह मूर्ति अपनी पदयात्रा पर निकल पड़ी है।

देश भर से श्रद्धालु इस पवित्र प्रस्थान को देखने के लिए एकत्रित हुए। एक श्रद्धालु ने कहा कि मैं पहली बार इस डोली यात्रा के लिए आया हूं। मेरी यह इच्छा थी, और अब मैं बाबा की डोली के साथ केदारनाथ तक जाऊंगा।

पांचवीं बार डोली यात्रा में भाग ले रहे 67 वर्षीय एक श्रद्धालु ने बताया कि यह मेरी पांचवीं डोली यात्रा है। अनुभव अद्भुत है। टीवी या यूट्यूब पर देखना अलग बात है, लेकिन यहां आकर इसे अनुभव करना सचमुच खास है।

डोली पहली रात फाटा में ठहरेगी और सोमवार को गौरीकुंड पहुंचकर एक और पड़ाव डालेगी। यह 21 अप्रैल को केदारनाथ धाम पहुंचेगी, जहां प्रतिमा को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। मंदिर के द्वार 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे पूर्ण वैदिक रीति-रिवाजों के साथ खुलेंगे, जो ग्रीष्मकालीन तीर्थयात्रा के प्रारंभ का प्रतीक है।

देश भर से हजारों श्रद्धालु आशीर्वाद लेने के लिए एकत्रित हुए हैं, जो इस यात्रा के आध्यात्मिक महत्व को दर्शाता है।

भारतीय सेना, विशेष रूप से गढ़वाल राइफल्स के एक बैंड ने जुलूस के दौरान एक महत्वपूर्ण औपचारिक भूमिका निभाई, जिसमें सैन्य परंपरा और गहरी आध्यात्मिक रीति-रिवाजों का अद्भुत संगम देखने को मिला।

–आईएएनएस

एमएस/


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