ईरान से बातचीत अनिश्चित, समझौते और सैन्य कार्रवाई दोनों विकल्प खुले: ट्रंप
वॉशिंगटन, 1 मई (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा प्रस्तावों से वे ‘खुश नहीं हैं’, साथ ही यह भी कहा कि कूटनीति और सैन्य कार्रवाई दोनों विकल्प खुले हैं।
ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, जब वे मरीन वन से रवाना हो रहे थे, “वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन मैं उससे संतुष्ट नहीं हूं, तो देखते हैं आगे क्या होता है।”
उन्होंने ईरान के नेतृत्व को बंटा हुआ और असमंजस में बताया। ट्रंप ने कहा कि वे सब समझौता करना चाहते हैं, लेकिन सब कुछ अस्त-व्यस्त है, और जोड़ते हुए कहा कि नेतृत्व ‘बहुत बिखरा हुआ’ है और अंदर ही अंदर मतभेद हैं।
ट्रंप का कहना था कि ईरान के अंदर की ये खींचतान उसकी बातचीत की स्थिति को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि वहां के नेता ‘एक-दूसरे से सहमत नहीं हैं’ और ‘उन्हें खुद नहीं पता कि असली नेता कौन है’, जिससे बातचीत मुश्किल हो रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की सेना काफी कमजोर हो चुकी है। ट्रंप के अनुसार हाल के संघर्ष के बाद देश के पास न नौसेना बची है, न वायुसेना, और रक्षा क्षमता भी सीमित रह गई है।
ट्रंप ने कहा कि अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो सैन्य कार्रवाई भी एक विकल्प है। उन्होंने कहा कि या तो तनाव बढ़ेगा या फिर समझौता होगा।
ट्रंप ने यह भी कहा कि सैन्य कदमों के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार ऐसी मंजूरी पहले कभी नहीं ली गई और कई लोग इसे पूरी तरह असंवैधानिक मानते हैं।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से ईरान पर दबाव बढ़ा है। ट्रंप बोले, “हम बड़ी जीत के बीच में हैं,” और कहा कि ईरान की कमजोर स्थिति ही उसे समझौते की ओर धकेल रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत चल रही है लेकिन लगातार बदलती रहती है। उनके अनुसार वे करीब आते हैं, फिर लोगों का एक नया ग्रुप आ जाता है, जिससे ईरान की स्थिति बदल जाती है।
ट्रंप ने यह भी बताया कि इस संघर्ष का असर दुनिया के तेल बाजार पर भी पड़ रहा है, और बहुत सारा तेल समुद्र में फंसा हुआ है क्योंकि आपूर्ति में रुकावट आई है।
अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए प्रतिबंधों और बातचीत दोनों का इस्तेमाल करता रहा है। लेकिन बातचीत बार-बार अटक जाती है, खासकर जांच, यूरेनियम संवर्धन की सीमा और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों को लेकर।
हाल की तनावपूर्ण स्थिति ने पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका भी बढ़ा दी है, और दुनिया भर के ऊर्जा बाजार खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री रास्तों पर नजर बनाए हुए हैं।
–आईएएनएस
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