आज का युवा सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि कौशल विकास पर ध्यान दे रहा: धर्मेंद्र प्रधान

जयपुर, 1 मई (आईएएनएस)। राजस्थान सरकार ने शुक्रवार को जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में आयोजित ‘फॉरेन लैंग्वेज कम्युनिकेशन स्किल्स प्रोग्राम’ के तहत हैदराबाद स्थित इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेज यूनिवर्सिटी और नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन समेत कई संस्थानों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राजस्थान के युवाओं में मेहनत, नवाचार, उद्यमिता और सांस्कृतिक अनुकूलन की स्वाभाविक क्षमता है। प्रधानमंत्री मोदी से प्रेरित होकर आज का युवा सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि कौशल विकास पर ध्यान दे रहा है।
उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते से विदेशी भाषाओं में दक्ष युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को समझने और जोड़ने का जरिया भी है।
उन्होंने कहा कि ‘नई शिक्षा नीति- 2020’ विकसित भारत के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम है, जिसमें बहुभाषी और वैश्विक शिक्षा पर खास जोर दिया गया है। फ्रेंच, जर्मन, जापानी, कोरियाई और स्पेनिश जैसी भाषाएं सीखने से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने की ताकत भी है।
उन्होंने भरोसा जताया कि भविष्य में राजस्थान की लोक परंपराएं, जैसे पृथ्वीराज चौहान की गाथाएं, विदेशी भाषाओं में अनुवादित होकर वैश्विक पहचान पाएंगी। जापान और कोरिया जैसे देशों में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं और भाषा कौशल तकनीक के साथ-साथ व्यापार और मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में भी अवसर खोल सकता है।
कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रारंभिक शिक्षा में मातृभाषा को प्राथमिकता दी गई है। स्थानीय भाषाएं सांस्कृतिक विरासत को बचाती हैं, आत्मविश्वास बढ़ाती हैं और भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करती हैं, जबकि विदेशी भाषाएं वैश्विक स्तर पर संवाद क्षमता को बढ़ाती हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पिछली सरकार में पेपर लीक जैसी घटनाओं ने युवाओं के साथ बड़ा अन्याय किया था। मौजूदा सरकार ने युवाओं को इस समस्या से मुक्ति दिलाई है। अब तक 351 परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता के साथ कराई गई हैं और एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार से जोड़कर उन्हें नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बना रही है। मुख्यमंत्री ने स्वामी विवेकानंद का जिक्र करते हुए युवाओं से विदेशी भाषाएं सीखने और राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के स्किल डेवलपमेंट विजन के तहत राज्य सरकार ने समझौते किए हैं। इनसे युवाओं को फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश, जापानी और कोरियाई जैसी भाषाएं सीखने का मौका मिलेगा। आज के वैश्विक दौर में विदेशी भाषाएं सीखना जरूरी हो गया है। इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और विदेशों में रोजगार के अवसर मिलते हैं। यह विदेशी पर्यटकों, निवेशकों और स्थानीय उद्योगों के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करती हैं।
राजस्थान के पर्यटन की संभावनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विदेशी भाषाओं का ज्ञान खासतौर पर ऐसे राज्य के लिए बेहद उपयोगी है, जहां दुनिया भर से पर्यटक आते हैं। सरकार की नीतियों से पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे विदेशी भाषा जानने वाले गाइड, होटल मैनेजर, ट्रैवल एजेंट और उद्यमियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
–आईएएनएस
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