गोवर्धन ‘अधिक मास’ मेले में मुस्लिम दुकानदारों पर प्रतिबंध लगाने की मांग का संतों ने किया समर्थन


प्रयागराज, 10 मई (आईएएनएस)। विश्व प्रसिद्ध तीर्थ नगर गोवर्धन में होने वाले आगामी ‘अधिक मास’ मेले से पहले, श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष पंडित दिनेश फलाहारी जी महाराज ने आयोजन संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर मांगें रखी हैं। महाराज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि मेले के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों को दुकानें लगाने या किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां करने से रोका जाए। इस मांग का प्रयागराज और अयोध्या के संतों ने समर्थन किया है।

नारायणाचार्य जगतगुरु शांडिल्य महाराज ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “अधिक मास मेले में मुस्लिम का कोई काम नहीं है। हम लोग मुस्लिमों के मेले या तीर्थ स्थल पर नहीं जाते तो उन्हें भी नहीं आना चाहिए। हम लोग शुद्धता से आयोजन करना चाहते हैं। दिनेश फलाहारी ने जो मांग की है, वह एकदम सही है। इस पर अमल करना चाहिए। मुस्लिमों को मेले में जाने से रोका जाना चाहिए।

जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि धर्म के आधार पर भारत के विभाजन के बावजूद, एक ओर जहां पाकिस्तान और बांग्लादेश में सीमा पार हिंदुओं को नागरिकता नहीं दी गई, वहां निरंतर अन्याय, अत्याचार और उनकी हत्याएं हुईं। दूसरी ओर भारत की स्वतंत्रता के बाद भी हिंदुओं, मुसलमानों, सिखों और ईसाइयों को समान अधिकार दिए गए। मदरसों में हिंदुओं के खिलाफ भड़काया जा रहा है, फिर भी सरकार पैसा दे रही है।”

परमहंस ने आगे कहा, “मेले में मुस्लिमों को प्रतिबंधित करने के लिए सिर्फ पत्र लिखना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए मथुरा निवासियों, साधु-संतों को लेकर धरना-प्रदर्शन करना चाहिए और बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरें, तब जाकर सरकार बात मानेगी। केवल एक व्यक्ति के पत्र लिखने से कुछ नहीं होगा। देश के मुखिया को यह मालूम है, लेकिन दुर्भाग्य है कि हिंदू कल भी बंटा था और आज भी बंटा है।”

साकेत भवन मंदिर, अयोध्या धाम के महंत सीताराम दास ने कहा, “श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी की सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मथुरा और गोवर्धन में अधिक मास में लगने वाले मेले के दौरान गैर-सनातनी लोगों के प्रवेश और उनकी दुकानों पर प्रतिबंध लगाने की मांग का समर्थन है। सभी धर्म क्षेत्रों में कट्टरपंथियों और जिहादियों की दुकानों को प्रतिबंधित कर देना चाहिए, क्योंकि यह सनातन धर्म के लिए खतरनाक हैं।”

–आईएएनएस

ओपी/एबीएम


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