जम्मू-कश्मीर: एनसीडब्ल्यू का 'शक्ति संवाद' कार्यक्रम महिला आयोगों के बीच मजबूत समन्वय


श्रीनगर, 17 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने सप्ताहांत के दौरान श्रीनगर में दो दिवसीय ‘शक्ति संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें राज्य महिला आयोगों की अध्यक्षों, सदस्यों और सदस्य सचिवों ने भाग लिया।

‘शक्ति संवाद’ कार्यक्रम का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण के लिए संबंधित आयोगों के बीच समन्वय को मजबूत करना था।

इस कार्यक्रम में 20 राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिसका मुख्य फोकस संस्थागत समन्वय को मजबूत करने, क्षमता निर्माण को बढ़ाने और महिलाओं के कल्याण व सशक्तिकरण के लिए संवाद को बढ़ावा देने पर था।

एनसीडब्ल्यू की प्रमुख विजया राहटकर ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, “आज न केवल योजनाएं और नीतियां बनाने की आवश्यकता है, बल्कि एक जवाबदेह इकोसिस्टम (परिवेश) बनाने की भी जरूरत है। एक ऐसा इकोसिस्टम, जहां एनसीडब्ल्यू केवल शिकायत निवारण का मंच न बनकर, विश्वास, न्याय और समर्थन का केंद्र बन जाए।”

उन्होंने आगे कहा, “जहां हर महिला को यह महसूस हो कि उसकी बात सुनी जाएगी और उसे गरिमा के साथ न्याय मिलेगा। ‘शक्ति संवाद’ केवल एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भारत की नारी शक्ति के सामूहिक संकल्प का एक जीवंत प्रतीक है। यह वह मंच है जहां विचार मिलते हैं, अनुभव जुड़ते हैं और संकल्प शक्ति में बदल जाते हैं।”

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जहां आज महिलाएं शासन, न्यायपालिका, विज्ञान, मीडिया और सार्वजनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं, वहीं उनकी सुरक्षा, गरिमा और समान अवसरों को सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक ज़िम्मेदारी बनी हुई है।

उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि महिला आयोग केवल शिकायत निवारण करने वाली संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि वे महिलाओं के लिए विश्वास, समर्थन और न्याय के संस्थान हैं।

राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह, जो इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर की महिलाएं प्रगति और नेतृत्व की एक मज़बूत शक्ति के रूप में उभर रही हैं। हमारी बेटियां शिक्षा, सिविल सेवाओं और नवाचार के क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं, और वे ‘2047 तक विकसित भारत’ के भविष्य को संवारने में एक अहम भूमिका निभाएंगी।”

उन्होंने भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को आगे बढ़ाने में समन्वित संस्थागत प्रयासों और नीतिगत समर्थन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी सामाजिक परिवर्तन के शक्तिशाली माध्यम हैं, और ये शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, उद्यमिता तथा डिजिटल अवसरों तक महिलाओं की पहुंच बढ़ाकर उनके जीवन को बेहतर बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

एक्सपर्ट और प्रतिभागियों ने भी देश भर में महिलाओं को प्रभावित करने वाली उभरती चुनौतियों के संदर्भ में बदलते कानूनी ढांचों, कार्यस्थल पर गरिमा और संस्थागत प्रतिक्रियाओं जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया और अपने सुझाव साझा किए।

–आईएएनएस

एससीएच


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