पाकिस्तान में निवेश की समीक्षा कर रही यूएई की टेलीकॉम कंपनी ‘एतिसलात’, बाहर निकलने की अटकलें तेज


नई दिल्ली, 1 मई (आईएएनएस)। यूएई की बड़ी टेलीकॉम कंपनी ‘एतिसलात’ पाकिस्तान में अपने निवेश की समीक्षा कर रही है। माना जा रहा है क‍ि ‘एतिसलात’ पीटीसीएल (पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन कंपनी लिमिटेड) से बाहर निकल सकती है।

‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘एतिसलात’ का कहना है कि यह समीक्षा इसलिए हो रही है, क्योंकि दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है। क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव हैं और सरकारी-संबद्ध निवेशकों की निवेश रणनीति भी बदल रही है।

अभी ‘एतिसलात’ की योजना शुरुआती जांच के चरण में है और कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। जब पीटीसीएल से इस बारे में पूछा गया, तो कंपनी ने ‘डॉन’ को बताया कि उसका लंबी अवधि का बिजनेस प्लान हाल ही में उसके बोर्ड और शेयरधारकों की ओर से मंजूर किया गया है।

कंपनी ने कहा क‍ि हमें शेयरधारकों की तरफ से किसी भी बदलाव की कोई जानकारी नहीं है।

पाकिस्तान के लिए पीटीसीएल एक बहुत महत्वपूर्ण कंपनी है। हालांकि इसका स्वामित्व मिला-जुला है। सरकार और उसकी संस्थाओं के पास लगभग 62 प्रत‍िशत हिस्सेदारी है, लेकिन 26 प्रत‍िशत शेयर और मैनेजमेंट कंट्रोल गल्फ की बड़ी टेलीकॉम कंपनी ‘एतिसलात’ के पास है, जिसने हाल ही में अपना ब्रांड बदलकर री-ऑर्गनाइजेशन भी शुरू किया है। बाकी 12 प्रत‍िशत शेयर पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज के जरिए निजी निवेशकों के पास हैं।

पीटीसीएल पिछले कुछ वर्षों से लगातार घाटे में चल रही थी, लेकिन हाल ही में टेलीनोर पाक‍िस्‍तान के अधिग्रहण के बाद कंपनी ने मुनाफा दिखाना शुरू किया है।

कुछ समय पहले ही इस्लामाबाद ने यूएई को लगभग 3.5 अरब डॉलर वापस किए हैं। ये पैसा पहले कई वर्षों तक यूएई आईएमएफ कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखने के लिए रोलओवर करता रहा था।

इसी बीच सऊदी अरब ने भी पाकिस्तान की मदद बढ़ा दी है और अपने जमा (डिपॉजिट) को तीन अरब डॉलर बढ़ाकर आठ अरब डॉलर कर दिया है, ताकि आईएमएफ की शर्तों के तहत वित्तीय कमी पूरी की जा सके। वहीं, आईएमएफ की कार्यकारी बोर्ड की बैठक आठ मई को होने वाली है, जिसमें पाकिस्तान के लिए 1.21 अरब डॉलर की अगली किस्त को मंजूरी मिल सकती है।

वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘डॉन’ को बताया कि यूएई के निवेशक अपने पोर्टफोलियो में कोई बदलाव करते हैं, तो पाकिस्तान के पास इसके लिए दूसरे मजबूत विकल्प मौजूद हैं। सऊदी और कतर के निवेशकों की दिलचस्पी से पाकिस्तान को निवेश और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

–आईएएनएस

एवाई/एबीएम


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