भारत की सेवा के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों का अनुसरण करें: त्रिपुरा मुख्यमंत्री

अगरतला, 4 जुलाई (आईएएनएस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शनिवार को लोगों से भारत केसरी श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों और सिद्धांतों का अनुसरण करने और राष्ट्र निर्माण एवं जनसेवा के लिए स्वयं को समर्पित करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री साहा ने मुखर्जी को एक महान देशभक्त, प्रख्यात शिक्षाविद, प्रतिष्ठित सांसद और दूरदर्शी राजनेता बताया। उन्होंने कहा कि उनका जीवन और विचार पीढ़ियों को देश के लिए निस्वार्थ भाव से काम करने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
साहा अगरतला में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित एक संगोष्ठी में संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई महान नेताओं ने देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया, लेकिन वर्षों तक लोगों को उनके योगदान के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई।
उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवाओं के महत्व पर लगातार जोर देते हैं और मानते हैं कि वे देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम सहित कई पहलें शुरू की हैं, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षाओं का सामना कर सकें। प्रधानमंत्री युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं क्योंकि सपने देखने वाले ही महान उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। आज के छात्र हमारे राज्य और राष्ट्र दोनों का भविष्य हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक असाधारण व्यक्तित्व थे, जो महज 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने। इसके साथ ही वे इस प्रतिष्ठित पद को संभालने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति बन गए।
उन्होंने कहा कि वे सर आशुतोष मुखर्जी के योग्य पुत्र थे। हालांकि वे एक आरामदायक जीवन चुन सकते थे, उन्होंने अपना जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर कहते हैं कि उनकी सबसे बड़ी ताकत देश के युवा हैं, विशेषकर 18 से 35 या 40 वर्ष की आयु के युवा।
साहा ने कहा कि युवाओं के समर्थन और भागीदारी से प्रधानमंत्री देश को आगे ले जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय महान व्यक्तित्व थे जिनके आदर्श आज भी हमारा मार्गदर्शन करते हैं। हमारी पार्टी का हर कार्यक्रम भारत माता, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि अर्पित करने से शुरू होता है क्योंकि उन्होंने ही हमें राष्ट्र की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने का मार्ग दिखाया।
साहा ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत समृद्ध, जीवंत और अटूट है, और इसे भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित और मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए।
–आईएएनएस
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