भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाने के लिए उद्योगों और सरकार में साझेदारी गहरी करना आवश्यक : पीयूष गोयल

नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाने, विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने और कारोबार में आसानी को बढ़ावा देने के लिए सरकार और उद्योगों के बीच साझेदारी को गहरा करने की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय राजधानी एसोचैम इंडिया बिजनेस रिफॉर्म सबमिट 2026 में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक स्थिति और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को भारत के लिए व्यापारिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने, तेजी से सुधार करने, अधिक लचीलापन विकसित करने और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
गोयल ने कहा, “भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी भी किसी संकट को व्यर्थ नहीं जाने दिया और विश्वास व्यक्त किया कि देश मौजूदा वैश्विक जोखिमों को विकास और सुधार के अवसरों में परिवर्तित करेगा।”
वैश्विक स्थिति में हो रहे बदलावों और पश्चिम एशिया संकट पर बोलते हुए गोयल ने कहा कि व्यवसायों को घबराए बिना अवसरों और जोखिमों दोनों के प्रति सतर्क रहना चाहिए।
उन्होंने कहा, “भारत ने कोविड-19 जैसी अप्रत्याशित चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है।”
उन्होंने अपव्यय को कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और ऊर्जा दक्षता उपायों को अपनाने सहित अधिक कुशल और प्रभावी व्यावसायिक प्रक्रियाओं की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, “कोविड काल के दौरान मिले अनुभवों ने डिजिटल सहभागिता और वर्क फ्रॉम होम मॉडल की प्रभावशीलता को प्रदर्शित किया है।”
भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) की तेज वृद्धि का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा कि देश में लगभग 1,800 जीसीसी कार्यरत हैं और लगभग 20 लाख प्रत्यक्ष और लगभग 10 करोड़ अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर रहे हैं।
गोयल ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में तेजी से पहचान रही हैं, जिसके पास युवा और प्रतिभाशाली मानव संसाधन हैं जो वैश्विक परिचालन में सहयोग करने में सक्षम हैं।”
मंत्री ने भारत के सेवा क्षेत्र में विश्वास व्यक्त किया और कहा कि एआई और साइबर सुरक्षा जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां नए अवसर पैदा करेंगी।
गोयल ने जोर देते हुए कहा, “भारत को उभरती टेक्नोलॉजी, व्यापार सुधारों और वैश्विक विकास को अवसरों के रूप में देखना चाहिए।”
उन्होंने बताया, “सरकार भरोसेमंद वैश्विक साझेदारियों, कम लागत पर डेटा की उपलब्धता, नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और मजबूत विद्युत अवसंरचना के माध्यम से डेटा केंद्रों और क्लाउड सेवाओं में निवेश के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है।”
–आईएएनएस
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