पश्चिम बंगाल: विधानसभा अध्यक्ष के चैंबर के बाहर धरने पर बैठे टीएमसी नेता, कहा- संवाद की परंपरा खत्म हो रही

कोलकाता, 27 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। बुधवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता और टीएमसी के वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय अपने साथी पार्टी नेता कुणाल घोष के साथ विधानसभा अध्यक्ष के चैंबर के बाहर धरने पर बैठ गए। उनका आरोप है कि वह स्पीकर से मिलने आए थे, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।
जानकारी के मुताबिक, शोभनदेव चट्टोपाध्याय और कुणाल घोष दोनों नेता विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मुलाकात करना चाहते थे। उनका कहना है कि वे कुछ जरूरी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आए थे, लेकिन उन्हें मिलने का समय नहीं दिया गया। इसी बात से नाराज होकर वे विधानसभा अध्यक्ष के चैंबर के बाहर ही धरने पर बैठ गए और वहीं अपनी नाराजगी जाहिर की।
इस पूरे मामले पर शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि यह कोई सामान्य स्थिति नहीं है। उनके मुताबिक, विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी बात सुनने की कोशिश नहीं की और वह वहां से चले गए।
शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा, “यह एक जैसी बात नहीं है। उन्होंने हमारी बात सुनने की कोशिश नहीं की और भागने लगे। वे सीआरपीएफ से घिरे हुए थे। हमारे कार्यकर्ता भी वहां थे। फिर भी, वे भागे और उनका पैर एक कुर्सी से टकरा गया। वे गिर सकते थे। हमने कुछ नहीं कहा और चुप रहे।”
उन्होंने आगे कहा कि पहले भी कई विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं, जैसे बिमान बनर्जी, हाशिम अब्दुल हलीम और अपूर्वा लाल मजूमदार और उन सभी के समय में इस तरह की कोई समस्या नहीं हुई थी। उनके अनुसार विधानसभा हमेशा चर्चा और संवाद का स्थान रही है, जहां विधायक अपनी बात रखने आते हैं, चाहे वह खुशी हो या कोई शिकायत।
दूसरी तरफ टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं और उन्होंने सभी जरूरी पत्र और दस्तावेज पहले ही भेज दिए थे। इसके बावजूद उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। कुणाल घोष ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता के पद को उचित मान्यता नहीं दी जा रही है और उन्हें आवास जैसी सुविधाएं भी नहीं दी गई हैं।
–आईएएनएस
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