महाराष्ट्र सरकार का यह कदम युवाओं के हितों पर कुठाराघात: अतुल लोंढे

मुंबई, 30 जुलाई (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता अतुल लोंढे ने राज्य सरकार पर युवाओं के हितों पर कुठाराघात करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस नेता अतुल लोंढे ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जिस दिन महाराष्ट्र के जेन जी पुलिस की लाठियां खा रहे थे, उसी दिन महाराष्ट्र सरकार में रेवेन्यू मंत्री ने एक ऐसा पत्र जारी किया, जिसने यहां के युवाओं के अधिकारी बनने के मार्ग पर रोड़ा अटका दिया। दरअसल, पहले महाराष्ट्र में 60 फीसदी अधिकारियों की नियुक्ति यूपीएससी के माध्यम से होती थी और 33 फीसदी अधिकारियों की पदोन्नति की जाती थी।
उन्होंने कहा कि अब सरकार ने 60 फीसदी अधिकारियों को पदोन्नति के रास्ते से लाने का फैसला किया। इससे अधिकारियों के लिए आगे के मार्ग संकुचित हो चुके हैं। इस तरह से सरकार ने 26 फीसदी अधिकारियों की कटौती कर दी है। इससे युवाओं के हितों पर कुठाराघात पहुंचा है। तहसीलदार और नायब तहसीलदार पदों पर इस तरह की व्यवस्था की गई है। नायब तहसीलदार के पदों को 80 फीसदी लोगों को पदोन्नति से भरने का फैसला किया गया है। 32 लाख से ज्यादा बच्चे महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में इन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। क्या महाराष्ट्र सरकार ने इन्हें यह कह दिया है कि अब इनके लिए कोई दरवाजे नहीं खुले हैं। क्या महाराष्ट्र सरकार का यह कहना है। क्या महाराष्ट्र सरकार यह कहना चाह रही है कि राज्य में मध्यमवर्गीय और किसानों के बच्चों को अधिकारी बनने का सपना छोड़ देना चाहिए। अब ऐसे लोगों को सरकार क्या जवाब देना चाहेगी, जिन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी जमीन बेच दी, अपने गहने बेच दिए और अपने बच्चों को दूसरे शहरों में पढ़ाई के लिए भेजा। क्या सरकार ऐसे लोगों से यह कहना चाह रही है कि अब तुम लोगों का सपना किसी भी कीमत पर पूरा होने वाला नहीं है। अब तुम लोग कर्ज में डूबकर मर जाओ।
कांग्रेस नेता ने कहा कि अब इन लोगों ने ऐसी व्यवस्था बच्चों के लिए तैयार कर दी है कि वो आत्महत्या करने पर बाध्य हो जाएंगे। क्या ये लोग ऐसी व्यवस्था को जन्म देना चाहते हैं, जिससे गरीब गरीब ही रहेगा। महंगाई की वजह से ऊंची शिक्षा प्राप्त करने के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं। अभी डॉक्टर, इंजीनियर जैसी पढ़ाइयों का क्या हाल है। नीट परीक्षा का क्या हाल है। यह बात किसी से छुपी नहीं है। अभी एमपीएससी से अधिकारी बनने के रास्ते भी बंद कर दिए गए हैं।
इस संबंध में बावनकुले ने एक्स पोस्ट भी किया है। वो अपनी पीठ थपथपाते हुए कह रहे हैं कि हमने सारे पद प्रमोशन से भर दिए हैं, जिस तरह से यूपीएससी का गठन किया गया था। एक तरह से इस पूरी प्रक्रिया के तहत जिस तरह से युवा अधिकारियों को तैयार किया जाता है, ताकि देश को लंबा अनुभव प्राप्त करने वाले अधिकारी मिलें, इस पूरी व्यवस्था को इन लोगों ने खत्म कर दिया। दूसरी अहम बात यह है कि प्रमोशन में रिजर्वेशन नहीं है। इस तरह से एससी/एसटी और महिलाओं के लिए दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं। इन लोगों ने पूरी सूझबूझ के साथ आरक्षण पर प्रहार करने की कोशिश की है और इस तरह का पत्र जारी करके संविधान पर भी हमला करने का प्रयास किया है।
उनके मुताबिक, मेडिकल विभाग में इन लोगों ने बाकायदा ऐसा करके दिखाया है। डायरेक्ट भर्ती वाले पदों को उन्होंने प्रमोशन में डालते हुए आरक्षण को खारिज करने का काम किया है, लेकिन इस मुद्दे को ये लोग विधानसभा में आने नहीं देते। कुल मिलाकर, ये लोग हर तरह से देश के 85 फीसदी लोगों का गला घोंटने का काम कर रहे हैं। आखिर भाजपा की सरकार क्या कर रही है? यह एक संगठित साजिश है, जिसके तहत कोशिश है कि कैसे भी करके बहुजनों को आगे बढ़ने से रोका जा सके। उन्हें मजदूर ही रहने दिया जाए। किसानों को कर्जे में डुबाया जा रहा है। इस तरह की कोशिश ये लोग लगातार कर रहे हैं, इसलिए आज की तारीख में इन पर कोई भरोसा नहीं कर रहा है।
साथ ही, उन्होंने ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन नहीं, बल्कि षड्यंत्र है। ऐसा करके बच्चों को गुमराह किया जा रहा है। जिन बच्चों को परेशान किया जा रहा है, उन्हें जरा यह देखना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट में ऊपर से लेकर नीचे तक सवर्ण जाति से जुड़े कितने लोग हैं। कितने सेक्रेटरी जनरल हैं। सवर्ण समुदाय से मीडिया में कितने लोग हैं। बमुश्किल 5 से 6 फीसदी ही बहुजन समाज से जुड़े लोग इन क्षेत्रों में आपको मिलेंगे, लेकिन हमारे बच्चों को इस बारे में जानकारी नहीं है।
–आईएएनएस
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