'अल्फा मेल' की अवधारणा को नहीं मानती हैं यह अभिनेत्री, बोलीं- ये पितृसत्ता का शब्द, मैं इससे सहमत नहीं


मुंबई, 16 मई (आईएएनएस)। अभिनेत्री सबा आजाद ने ‘अल्फा मेल’ की अवधारणा पर सवाल उठाते हुए इसे पितृसत्ता द्वारा गढ़ा गया शब्द बताया है। उन्होंने कहा कि यह शब्द पुरानी पितृसत्तात्मक सोच को जिंदा रखने के लिए बनाया गया है। इस वजह से वह इसे नहीं मानती हैं।

सबा आजाद ने आईएएनएस के साथ खास बातचीत में स्पष्ट रूप से कहा, “सच कहूं तो मुझे ‘अल्फा मेल’ का कॉन्सेप्ट समझ नहीं आता। मुझे लगता है कि यह पितृसत्ता द्वारा बनाया गया एक शब्द है ताकि पितृसत्तात्मक विचार जिंदा रहें। मैं इसे बिल्कुल भी नहीं मानती।”

सबा ने आगे कहा कि उनके परिवार और दोस्तों में कई बेहतरीन पुरुष हैं, लेकिन फिर भी उन्हें ‘अल्फा’ शब्द का असली मतलब समझ नहीं आता। उन्होंने जोर देकर कहा कि कमजोरी को ‘कम मर्दाना’ मानने की सोच पुरानी और गलत है।

सबा का मानना है कि हमारे देश के कई हिस्सों में महिलाओं को आज भी आजादी से काम करने या अपने फैसले खुद लेने की अनुमति नहीं है। उन्होंने बताया कि हो सकता है कि शहरों में हमें यह सच्चाई कम दिखाई दे, लेकिन यह आज भी है। इसलिए महिलाओं को अक्सर घर के साथ ही बाहर भी खुद को साबित करना पड़ता है। अगर वे काम करती हैं तो लोग उन पर सवाल करते हैं। अगर वे काम नहीं करतीं तो उन्हें जज किया जाता है।

सबा जल्द ही वेब सीरीज “हूज योर गाइनेक?” के दूसरे सीजन में डॉ. विधुशी कोठारी के रोल में वापसी करने वाली हैं। बातचीत के दौरान सबा से यह भी पूछा गया कि जब कोई शो सफल हो जाता है तो एक्टर्स की जिम्मेदारी बढ़ जाती है या नहीं। इसका जवाब देते हुए उन्होंने बताया, “मुझे लगता है कि हर किसी की जिम्मेदारी बराबर होती है। हम जो करते हैं, वह एक बहुत बड़े प्रोजेक्ट का सिर्फ छोटा सा हिस्सा होता है।”

सबा ने लेखकों की जिम्मेदारी पर खास जोर देते हुए कहा कि उन्हें कहानी को आगे बढ़ाने के साथ-साथ उसमें एकरूपता भी बनाए रखनी होती है। उन्होंने कहा कि शो के सफल होने पर दर्शकों की उम्मीदें बढ़ जाती हैं। ऐसे में एक्टर्स को अपने किरदार में वही ईमानदारी, खूबियां और कमियां दिखानी चाहिए जिन्हें लोग पहले सीजन में पसंद करते हैं।

–आईएएनएस

एमटी/डीकेपी


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