ढाई साल तक रची कारोबारी के घर लूट की साजिश फिर वॉचमैन की हत्या, फिल्म डायरेक्टर के ड्राइवर समेत 5 गिरफ्तार

मुंबई, 8 अगस्त (आईएएनएस)। मुंबई के विले पार्ले इलाके में स्थित अभिजीत रेजिडेंशियल बिल्डिंग में नाइट ड्यूटी पर तैनात वॉचमैन मनोज यादव की हत्या के मामले में जुहू पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस हत्याकांड में एक कारोबारी के यहां काम करने वाला रसोइया और एक फिल्म निर्देशक का ड्राइवर भी शामिल है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने ढाई वर्ष पहले चोरी की साजिश रची थी। वे छठी मंजिल पर रहने वाले कारोबारी, पत्नी और बेटी की हत्या कर लूटपाट की घटना को अंजाम देने वाले थे। आरोपी जोगेश्वर मलिक ने पुलिस को बताया कि उसने अलमारी में रखा कैश और कीमती सामान देख लिया था और तब से चुराने की साजिश रची थी।
जोगेश्वर मलिक कारोबारी के यहां काम करता था। वह बिहार के मधुबनी का रहने वाला है। पुलिस ने बताया कि साजिश का मास्टरमाइंड जोगेश्वर मलिक ही था। वह 10 वर्ष से नौकरी कर रहा था। उसने फ्लैट की डुप्लिकेट चाबी बनवाई और विजय गोंजारे के साथ मिलकर करीब ढाई साल तक लूट की योजना बनाई। विजय गोंजारे एक प्रसिद्ध बॉलीवुड फिल्म निर्देशक का ड्राइवर है।
पुलिस ने बताया पकड़े जाने के डर से दोनों ने 6 महीने पहले मोबाइल पर बात करना बंद कर दिया था और इसके बजाय हर रात करीब 9.30 बजे ड्यूटी खत्म करने के बाद जुहू में अलग-अलग जगहों पर आमने-सामने मिलते थे।
योजना को अंजाम देने के लिए मलिक ने गोंजारे से 3 और साथी जुटाने को कहा। पुलिस के मुताबिक यह तय हुआ था कि लूटे गए सामान में से 50 प्रतिशत मलिक को मिलेगा और बाकी 50 प्रतिशत अन्य 4 आरोपियों में बांटा जाएगा।
पुलिस ने कहा कि जब हमने मलिक को पकड़ा तो उसके नियोक्ता बचाव में आ गए और उसके साथ खड़े हो गए, उनका कहना था कि मलिक इसमें शामिल नहीं हो सकता, उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि साजिश असल में उनके पूरे परिवार की लूट और हत्या की थी।
पुलिस ने बताया कि मलिक और गोंजारे एक-दूसरे को पहले से जानते थे। गोंजारे पहले जुहू की उसी बिल्डिंग में काम करता था, जहां फिल्म निर्देशक रहते हैं और उसी बिल्डिंग में मलिक के नियोक्ता भी रहते थे, बाद में वह विले पार्ले (पश्चिम) शिफ्ट हो गया था।
पुलिस ने बताया कि गोंजारे ने वारदात को अंजाम देने से एक दिन पहले तीनों साथियों का परिचय वॉचमैन मोहन यादव से कराया और उसका भरोसा जीतने के लिए उसे 500 रुपए भी दिए। साथ ही कहा कि वे अगले दिन पार्टी के लिए आएंगे। 1 अगस्त की रात चारों आरोपी बिल्डिंग में इकट्ठा हुए और मोहन यादव के साथ शराब पी। उन्होंने उसकी शराब में नशीला पदार्थ मिला दिया था, लेकिन जब उसका असर कम हुआ तो उन्होंने गला दबाकर मनोज यादव की हत्या कर दी। आरोपियों ने उसके हाथ पीछे बांध दिए और शव को पानी की टंकी में डालकर ढक्कन बंद कर दिया।
2 अगस्त को सुबह 4.30 बजे गोंजारे और तीनों साथी छठी मंजिल पर गए और डुप्लिकेट चाबी से कारोबारी के फ्लैट का ताला खोलने की कोशिश की। जब ताला नहीं खुला तो सभी भाग गए। आरोपियों के पास हथौड़े भी थे ताकि जरूरत पड़ने पर लूट में इस्तेमाल कर सकें।
पुलिस के अनुसार, मलिक और गोंजारे दोनों ने करीब ढाई साल से इस अपराध की योजना बनाने की बात कबूल की है। 2 अगस्त को हत्या का मामला दर्ज किया गया। जब रिलीव करने आए सिक्योरिटी गार्ड ने यादव का शव देखा और पुलिस को सूचना दी थी।
पुलिस के अनुसार आरोपियों को लगा था कि वे बिना पकड़े लूट की घटना को अंजाम दे देंगे, क्योंकि 10 मंजिला बिल्डिंग में सिर्फ 3 परिवार रहते थे। पहली 2 मंजिलों पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान थे और ज्यादातर आवासीय फ्लैट खाली थे, क्योंकि फ्लैट मालिकों ने रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के चलते घर खाली कर दिए थे।
–आईएएनएस
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