मोदी जैकेट पर पीएम ने बिल गेट्स को सुनाया मजेदार किस्सा…

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने हाल ही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लेकर स्वास्थ्य, क्लाइमेट और रीसाइक्लिंग समेत कई मुद्दों पर बेहद खास चर्चा की। पीएम मोदी और बिल गेट्स की इस चर्चा का एक वीडियो आज रिलीज किया गया है। इस वीडियो में पीएम मोदी ने भारत में टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और रीसाइक्लिंग को लेकर दिल खोलकर बात की। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिल गेट्स को अपने भविष्य के लक्ष्यों के बारे में भी बताया।

पीएम मोदी ने बिल गेट्स को सुनाया रोचक किस्सा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत पवन और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। भारत परमाणु ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन में तेजी से आगे बढ़ना चाहता है। माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने कचरे के पुनर्चक्रण की भारत की संस्कृति के बारे में बात की। पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने जो जैकेट पहनी है, वह रिसाइकिल सामग्री से बनी है।

रिसाइकिल सामग्री से बनी जैकेट पहनते हैं पीएम

पीएम मोदी ने कहा कि इसकी खासियत यह है कि इसमें कपड़े के छोटे-छोटे टुकड़ों और रिसाइकिल प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग किया गया है। यह जैकेट पुनर्चक्रित सामग्री से बनाई गई है। पुनर्चक्रण और पुन:उपयोग हमारी प्रकृति में निहित है। इस जैकेट में चालीस प्रतिशत बेकार प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग किया गया है।

भारत हमेशा युवाओं को नए विचारों के लिए प्रोत्साहित करता है

पीएम मोदी ने बिल गेट्स से कहा कि देश नवीकरणीय ऊर्जा में तेजी से विकास कर रहा है और युवा पीढ़ी को नवीन विचारों के साथ योगदान करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए बजट में 1 लाख करोड़ रुपये के कॉर्पस फंड का प्रावधान किया है। युवा पीढ़ी को अपने नए विचारों में योगदान देने के लिए एक कोष भी स्थापित किया है। जिससे युवाओं को 50 वर्षों के लिए ब्याज मुक्त ऋण मिलता है।

पर्यावरण के लिए जीवनशैली

पीएम मोदी ने बिल गेट्स से कहा कि हमें अपनी जीवनशैली में एक और महत्वपूर्ण चीज़पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इसीलिए मैंने मिशन जीवन शुरू किया है जो पर्यावरण के लिए जीवनशैली पर आधारित है। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रतिदिन जलवायु के अनुकूल जीवन जीना महत्वपूर्ण है। अगर हम ऐसा जीवन नहीं अपनाते हैं जो प्रकृति का सम्मान करता है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम कितना बाहरी प्रयास करते हैं और कितने नए आविष्कार करते हैं। हमारे जीवन का तरीका समन्वय में होना चाहिए। हमारी वर्तमान चुनौती यह है कि हम प्रगति को कैसे देखते हैं।

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