पीडीपी पहले पिछले 10 वर्षों की भर्तियों की जांच मांग करे, वर्तमान सरकार तैयार है: सकीना इटू

श्रीनगर, 21 जून (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने रविवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष को सबसे पहले पिछले 10 वर्षों में हुई भर्तियों की जांच की मांग करनी चाहिए।
सकीना इटू ने भर्तियों और आउटसोर्सिंग से संबंधित आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अगर पीडीपी हालिया भर्तियों की जांच की मांग कर रही है तो उसे पहले पिछले दशक के दौरान की गई सभी भर्तियों की जांच की मांग करनी चाहिए।
श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर (एसकेआईसीसी) में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह के मौके पर मंत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और वह किसी भी जांच का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
इटू ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा, “अगर पीडीपी भर्तियों की जांच चाहती है तो उसे पहले पिछले 10 वर्षों में की गई सभी भर्तियों की जांच करनी चाहिए।”
सरकार पर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि आउटसोर्सिंग प्रणाली वर्तमान प्रशासन द्वारा शुरू नहीं की गई थी।
उन्होंने कहा कि यह प्रथा पहले से चली आ रही है और वर्तमान सरकार को उसके कार्यकाल से पहले शुरू की गई नीतियों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और वह किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार है।” उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में बनी हुई है।
विभिन्न सरकारी विभागों में भर्ती प्रक्रियाओं और आउटसोर्सिंग नीतियों पर चल रही राजनीतिक बहस के बीच मंत्री की टिप्पणी आई है।
उन्होंने दोहराया कि सरकार सभी प्रशासनिक मामलों में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पीडीपी जम्मू-कश्मीर में योग्य बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने में कथित रूप से विफल रहने के लिए उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) सरकार की आलोचना करती रही है।
पीडीपी ने लिखित परीक्षाओं के लिए प्रश्न पत्र तैयार करने के लिए बाहरी एजेंसियों को शामिल करने के लिए एनसी सरकार की भी आलोचना की है और आरोप लगाया है कि ये अक्सर लीक हो जाते हैं, जिससे भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता कम हो जाती है।
–आईएएनएस
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