धरोहर संरक्षण में जनभागीदारी का नया मॉडल, यूपी में 5 ‘स्मारक मित्र’ चुने गए


लखनऊ, 24 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए ‘एडॉप्ट ए हेरिटेज पॉलिसी’ के तहत जनभागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस नीति के अंतर्गत अब तक पांच संरक्षित स्मारकों और पुरास्थलों के लिए ‘स्मारक मित्रों’ का चयन किया गया है, जबकि अगले चरण में 26 अन्य ऐतिहासिक स्थलों के लिए इच्छुक संस्थाओं से प्रस्ताव आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि इस पहल से न केवल स्मारकों के संरक्षण और संवर्धन को गति मिलेगी, बल्कि पर्यटक सुविधाओं के विकास और विरासत के प्रति जन जागरूकता को भी नया आयाम मिलेगा। पर्यटन मंत्री ने बताया कि मथुरा के कुसुमवन सरोवर, रसखान की समाधि और पोतराकुंड; झांसी के लक्ष्मी मंदिर तथा लखनऊ के हुलासखेड़ा पुरास्थल के लिए स्मारक मित्रों का चयन किया जा चुका है। इन संस्थाओं के सहयोग से संबंधित स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं के विकास, रखरखाव और पर्यटक अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को केवल सरकारी जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास कर रही है। इसी उद्देश्य से कॉर्पोरेट संस्थानों, शैक्षणिक संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है, ताकि ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

जयवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश के अन्य संरक्षित स्मारकों और पुरास्थलों के लिए भी स्मारक मित्र नामित किए जाएंगे। इसके लिए जल्द ही ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (ईओआई) आमंत्रित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक धरोहरें हमारी सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली इतिहास की जीवंत धरोहर हैं। इनके संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता पैदा करना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि एडॉप्ट ए हेरिटेज पॉलिसी के माध्यम से सरकार पर्यटन विकास और सांस्कृतिक संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ा रही है। इससे ऐतिहासिक स्थलों पर सुविधाओं का विस्तार होगा, पर्यटन को नई गति मिलेगी और युवा पीढ़ी को प्रदेश की समृद्ध विरासत और इतिहास से जुड़ने का अवसर प्राप्त होगा। साथ ही आम लोगों में अपनी सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी विकसित होगी।

–आईएएनएस

विकेटी/डीकेपी


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