बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी, सात और बच्चों की मौत

ढाका, 20 जून (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे (मीजल्स) का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। शनिवार को सात और बच्चों की मौत के बाद इस साल 15 मार्च से अब तक खसरे से हुई पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 677 हो गई है। देश में स्वास्थ्य संकट गहराने के बीच संक्रमण के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, शनिवार सुबह तक पिछले 24 घंटों में सात बच्चों की मौत दर्ज की गई, जिन्हें संदिग्ध खसरा पीड़ित माना गया है। इसके साथ ही संदिग्ध मौतों की संख्या बढ़कर 584 हो गई है, जबकि पुष्टि किए गए मृतकों की संख्या 93 बनी हुई है।
डीजीएचएस के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में खसरे के 807 नए संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिससे संदिग्ध मरीजों की कुल संख्या 91,789 तक पहुंच गई है। इसी अवधि में 80 नए पुष्ट मामले दर्ज किए गए, जिसके बाद कुल पुष्ट संक्रमितों की संख्या बढ़कर 10,949 हो गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, खसरे और संदिग्ध खसरे के कुल मामलों की संख्या एक लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। यह स्थिति तब है जब एक महीने पहले ही 1.84 करोड़ बच्चों को शामिल करते हुए बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया गया था।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में टीकाकरण कवरेज में कमी और संक्रमण नियंत्रण उपायों के कमजोर क्रियान्वयन के कारण बीमारी पर काबू नहीं पाया जा सका है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि डेंगू सीजन शुरू होने से खसरे से संक्रमित बच्चों में गंभीर जटिलताओं का खतरा और बढ़ सकता है।
जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्तुक हुसैन ने कहा कि खसरे के मामलों में कमी नहीं आने के दो प्रमुख कारण हैं- सभी क्षेत्रों में 95 प्रतिशत टीकाकरण कवरेज हासिल न होना और अस्पतालों व समुदायों में संक्रमण रोकथाम उपायों का पर्याप्त पालन न किया जाना।
इस बीच, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पूर्व अंतरिम सरकार और मौजूदा सरकार पर टीकाकरण कार्यक्रम को बाधित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि नई वैक्सीन खरीद प्रणाली लागू करने के प्रयास में टीकाकरण व्यवस्था प्रभावित हुई और वर्तमान सरकार की कथित लापरवाही व अक्षमता के कारण यह बीमारी महामारी का रूप ले चुकी है।
शेख हसीना ने आरोप लगाया कि देश के 61 जिलों में लाखों बच्चे इस बीमारी से प्रभावित हैं और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 600 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। उन्होंने इसे महज दुर्घटना नहीं बल्कि “प्रशासनिक अपराध” करार दिया।
–आईएएनएस
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