संस्थागत विफलताओं के बीच पाकिस्तान में नशे का जाल गहराया, रिपोर्ट में गंभीर सवाल


कोलंबो, 20 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान में मादक पदार्थों की बढ़ती समस्या अब केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह शासन व्यवस्था, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सीमा सुरक्षा, शिक्षा और आर्थिक असुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों को प्रभावित कर रही है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान में नशीले पदार्थों का नेटवर्क संस्थागत विफलताओं, कमजोर कानून-प्रवर्तन और अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण लगातार मजबूत होता जा रहा है।

श्रीलंका के समाचार पत्र ‘डेली मिरर’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान के तस्करी मार्गों से लेकर कराची के संपन्न इलाकों में कोकीन वितरण नेटवर्क तक, पूरे देश में एक ऐसा संगठित तंत्र विकसित हो चुका है जिसने आधुनिक तकनीक, बदलती मांग और क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढाल लिया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कराची की व्यस्त सड़कों पर अब नशीले पदार्थ केवल अपराधियों के गुप्त ठिकानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्मार्टफोन ऐप, कूरियर जैसी डिलीवरी सेवाओं और संगठित सप्लाई चेन के जरिए पॉश कॉलोनियों, विश्वविद्यालय परिसरों और रिहायशी इलाकों तक आसानी से पहुंच रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अफगानिस्तान, ईरान और बलूचिस्तान से जुड़ी पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर तस्कर कमजोर सीमा निगरानी का फायदा उठाकर मादक पदार्थों की तस्करी कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में कराची की कथित ड्रग तस्कर अनमोल उर्फ ‘पिंकी’ की गिरफ्तारी ने पाकिस्तान के नारकोटिक्स नेटवर्क को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इसे केवल एक आपराधिक मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसने राज्य संस्थाओं की कार्यप्रणाली और ड्रग माफिया के प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिपोर्ट में बताया गया कि पिंकी पर कराची में एक संगठित कोकीन वितरण नेटवर्क चलाने का आरोप है। अदालत में पेशी के दौरान उसके साथ कथित तौर पर विशेष व्यवहार किए जाने के वीडियो सामने आने के बाद विवाद और बढ़ गया। इसके बाद कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया और आरोपों की जांच शुरू की गई कि कुछ पुलिसकर्मियों ने आरोपी को संरक्षण या सुविधा उपलब्ध कराई थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बदलते बाजार और तस्करी के नए तौर-तरीकों के बीच ड्रग सिंडिकेट कमजोर सीमा नियंत्रण और बिखरे हुए कानून-प्रवर्तन तंत्र का फायदा उठा रहे हैं। इस बीच पाकिस्तान की मादक पदार्थ निरोधक व्यवस्था पर संस्थागत समझौते और भ्रष्टाचार के आरोप लगातार लगते रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, पिंकी मामले में पुलिस अधिकारियों का निलंबन इस आशंका को मजबूत करता है कि कानून लागू कराने वाले कुछ अधिकारी भी आपराधिक नेटवर्क के प्रभाव में आ सकते हैं। हालांकि जांच अभी जारी है, लेकिन इस घटना ने यह धारणा मजबूत की है कि कार्रवाई केवल व्यक्तिगत तस्करों तक सीमित रहती है, जबकि पूरे नेटवर्क और उसे संरक्षण देने वाले ढांचे पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान में मादक पदार्थों की तस्करी और अधिकारियों की कथित लापरवाही से जुड़े ऐसे विवाद नए नहीं हैं। समय-समय पर बड़े मामलों में गिरफ्तारियां होती हैं, जवाबदेही के दावे किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद ऐसे मामले लगातार सामने आते रहते हैं, जिससे संस्थागत सुधारों की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट होती है।

–आईएएनएस

डीएससी


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