चार भारतीय युद्धपोतों के बाद आईएनएस सुदर्शिनी पहुंचा मोरक्को

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी मोरक्को के प्रमुख बंदरगाह शहर कासाब्लांका पहुंचा है। आईएनएस सुदर्शिनी यहां अपने ट्रांसओशनिक अभियान ‘लोकायन 26’ के तहत आया है।
खास बात यह है कि पिछले एक वर्ष में भारतीय नौसेना के चार युद्धपोत कासाब्लांका का दौरा कर चुके हैं। इनमें आईएनएस तबर, आईएनएस तरकश, आईएनएस सुमेधा, और आईएनएस तुशील शामिल हैं। ये नौसैनिक गतिविधियां दोनों देशों के बीच मजबूत होते विश्वास और इंटरऑपरेबिलिटी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती हैं। यही नहीं, नवंबर 2025 में रॉयल मोरक्कन नेवी के इंस्पेक्टर, रियर एडमिरल मोहम्मद ताहिन ने भारत के साउदर्न नेवल कमांड का दौरा किया था।
अब मोरक्को में आईएनएस सुदर्शिनी के इस ऐतिहासिक पड़ाव को अभियान की एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है। यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए भारत के महासागर विजन के अनुरूप है। साथ ही यह समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रतीक भी है।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक आईएनएस सुदर्शिनी का मोरक्को दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती समुद्री पहुंच और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। पोत के कासाब्लांका पहुंचने पर इसके कमांडिंग ऑफिसर ने मोरक्को नौसेना के सेंट्रल मैरीटाइम सेक्टर के कमांडर कमोडोर हसन अकौली और रॉयल नेवल स्कूल के निदेशक कमोडोर ओमर नासरी से मुलाकात की है। इस दौरान दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग, प्रशिक्षण आदान-प्रदान और संयुक्त गतिविधियों को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई।
तीन दिवसीय इस प्रवास के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी का दल रॉयल मोरक्कन नेवी के अधिकारियों के साथ पेशेवर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेगा। साथ ही पोत पर वरिष्ठ अधिकारियों और विशिष्ट अतिथियों की मेजबानी भी की जाएगी। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच नौसैनिक सहयोग, कूटनीतिक संबंध और आपसी विश्वास को और प्रगाढ़ करना है। यह दौरा जहाज के प्रशिक्षुओं और चालक दल के लिए भी महत्वपूर्ण अनुभव साबित होगा। इस यात्रा से चालक दल को अंतरराष्ट्रीय समुद्री वातावरण और नौवहन कौशल का व्यावहारिक ज्ञान मिलेगा।
साथ ही यह भारत की बढ़ती वैश्विक समुद्री उपस्थिति और समुद्री कूटनीति को भी प्रदर्शित करता है। नौसेना के मुताबिक आईएनएस सुदर्शिनी का यह अभियान प्राचीन समुद्री मार्गों और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से होकर गुजर रहा है, जो वसुधैव कुटुंबकम की भावना को साकार करता है। यह यात्रा वैश्विक समुद्री सहयोग, शांति और सद्भाव के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को एक बार फिर मजबूत रूप से स्थापित कर रही है।
–आईएएनएस
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