भारतीय निर्माण उपकरण उद्योग के निर्यात में वित्त वर्ष 2026 में 31.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई


नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। वित्त वर्ष 2026 में भारत का निर्माण उपकरण उद्योग मजबूत बना रहा और घरेलू बिक्री में गिरावट के बावजूद निर्यात में 31.5 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई। यह जानकारी एक रिपोर्ट में शुक्रवार को दी गई।

इंडियन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईसीईएमए) की रिपोर्ट में कहा गया है कि बुनियादी ढांचे के धीमे निर्माण और परियोजनाओं में देरी के बावजूद निर्यात में वृद्धि ने इस क्षेत्र को मजबूत बनाए रखने में मदद की है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा निर्माण उपकरण बाजार बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025 में इस क्षेत्र का अनुमानित मूल्य 10 अरब डॉलर था और 2030 तक 8.3 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़कर 14.76 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

वित्तीय वर्ष के दौरान कुल उपकरणों की बिक्री में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 1,36,995 यूनिट रह गई। एसोसिएशन ने बताया कि गैर-ओईएम निर्यात को छोड़कर, घरेलू मांग में अधिकांश उपकरण श्रेणियों में लगभग 7 प्रतिशत की वार्षिक गिरावट दर्ज की गई।

आईसीईएमए के अध्यक्ष और जेसीबी इंडिया लिमिटेड के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक दीपक शेट्टी ने कहा,“वित्त वर्ष 2026 में देखी गई मामूली गिरावट को उद्योग की किसी संरचनात्मक कमजोरी के बजाय जमीनी स्तर पर बुनियादी ढांचे के धीमे क्रियान्वयन के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “हालांकि सरकारी पूंजीगत व्यय आवंटन ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर बना हुआ है, लेकिन परियोजना क्रियान्वयन में देरी, भूमि अधिग्रहण संबंधी चुनौतियां और धीमी वितरण प्रक्रिया ने वर्ष के दौरान उपकरणों की मांग को प्रभावित किया।”

शेट्टी ने कहा कि निर्यात वृद्धि ने भारतीय निर्मित निर्माण उपकरणों की बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को दिखाया है और एसोसिएशन भारत के निरंतर बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित प्रयासों से प्रेरित उद्योग के दीर्घकालिक विकास पथ के प्रति आश्वस्त है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण में देरी, परियोजनाओं के कम आवंटन और जल जीवन मिशन जैसे कार्यक्रमों के लिए निधि वितरण में कमी से घरेलू मांग प्रभावित हुई।

इसके अलावा, ठेकेदारों के भुगतान में देरी से बुनियादी ढांचा क्षेत्र में तरलता कम हो गई और उद्योग की वित्तपोषण पर उच्च निर्भरता को देखते हुए सीईवी स्टेज वी उत्सर्जन मानदंडों के लागू होने से उपकरणों की लागत में काफी वृद्धि हुई।

आईसीईएमए के उपाध्यक्ष और केस कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के भारत और सार्क के प्रबंध निदेशक, शलभ चतुर्वेदी ने कहा, “भारत की बुनियादी ढांचा विकास गाथा मजबूत बनी हुई है। परियोजनाओं का समय पर निष्पादन, जमीनी स्तर पर तेजी से कार्यान्वयन और ठेकेदारों के लिए बेहतर तरलता सहायता इस क्षेत्र के विकास की गति को बहाल करने में महत्वपूर्ण होगी।”

एसोसिएशन ने कहा कि भारतीय निर्माण उपकरण उद्योग सड़कों, रेलवे, खनन, शहरी बुनियादी ढांचे, आवास और ग्रामीण विकास में निरंतर निवेश से प्रेरित होकर दीर्घकालिक विकास संभावनाओं के प्रति आशावादी बना हुआ है।

निर्यात का मजबूत आधार, सुदृढ़ घरेलू विनिर्माण प्रणाली और अवसंरचना विकास पर सरकार का निरंतर ध्यान आने वाले वर्षों में उद्योग की निरंतर वृद्धि को समर्थन देने की उम्मीद है।

–आईएएनएस

एबीएस/


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