गुजरात ने बढ़ाई बैटरी ऊर्जा स्टोरेज क्षमता, 870 मेगावाट तक पहुंचा नेटवर्क


गांधीनगर, 8 मई (आईएएनएस)। गुजरात ने नवीकरणीय ऊर्जा के उतार-चढ़ाव वाले उत्पादन को नियंत्रित करने और ग्रिड की स्थिरता को मतबूत करने के व्यापक प्रयासों के तहत पांच चालू स्थानों पर अपनी बैटरी ऊर्जा स्टोरेज क्षमता को बढ़ाकर 870 मेगावाट कर दिया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

राज्य की यह नई क्षमता वृद्धि, बैटरी ऊर्जा स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) को जल्दी अपनाने की उसकी पहल पर आधारित है। इसकी शुरुआत सबसे पहले मेहसाणा जिले के मोढेरा में हुई थी, जिसे भारत के पहले सौर-ऊर्जा संचालित गांव के रूप में मान्यता प्राप्त है, जहां सौर ऊर्जा उत्पादन को बैटरी स्टोरेज के साथ एकीकृत किया गया था।

गुजरात ने इसी मॉडल का अनुसरण करते हुए धीरे-धीरे कई स्थानों पर स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर की तैनाती का विस्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, अब राज्य भर में पांच स्थानों पर बैटरी स्टोरेज सिस्टम चालू हैं। हाल ही में चालू की गई सुविधाओं में अहमदाबाद जिले की साणंद तालुका के चारल स्थित एक सुविधा भी शामिल है।

अन्य चालू स्थानों में मोढेरा और कच्छ स्थित लखपत शामिल हैं, जिससे कुल स्थापित क्षमता 870 मेगावाट तक पहुंच गई है। यह विस्तार, राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण रणनीति के तहत पहले चरणबद्ध तरीके से की गई स्थापनाओं के बाद किया गया है।

मौजूदा परियोजनाओं के अलावा, अहमदाबाद, गांधीनगर, बनासकांठा, पाटन और कच्छ जिलों में 13 नई बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं का पंजीकरण किया गया है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य स्टोरेज क्षमता को और मजबूत करना तथा ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को बढ़ावा देना है, क्योंकि सौर और पवन स्रोतों से ऊर्जा उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि बैटरी स्टोरेज के विस्तार का मुख्य उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, विशेष रूप से सौर ऊर्जा के उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है। सौर ऊर्जा का उत्पादन दिन के समय अपने चरम पर होता है, लेकिन शाम के समय इसमें गिरावट आ जाती है, जबकि आमतौर पर इसी समय बिजली की मांग बढ़ जाती है।

संग्रहीत बिजली का उपयोग बिजली की मांग के चरम समय में किया जा सकता है, जिससे ग्रिड पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होती है।

इस पहल को ‘गुजरात एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा नीति-2025’ में शामिल किया गया है। इस नीति के तहत बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं को स्वतंत्र इकाइयों के रूप में और साथ ही नई तथा मौजूदा नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के साथ मिलाकर विकसित किया जा रहा है।

इस नीतिगत ढांचे में भविष्य में औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के साथ भी स्टोरेज सिस्टम को एकीकृत करने का प्रावधान है। यह सुविधा तभी उपलब्ध होगी, जब इसके लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) पूरी तरह से तय कर ली जाएंगी, जिससे ये उपभोक्ता अपने नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को स्टोरेज क्षमता के साथ जोड़ सकेंगे।

एक बार इन प्रक्रियाओं को मंजूरी मिल जाने के बाद औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं के लिए बैटरी स्टोरेज सिस्टम के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। इससे उन्हें ऐसे सिस्टम को अपनी स्वयं की सौर या पवन ऊर्जा उत्पादन इकाइयों के साथ एकीकृत करने की सुविधा मिल जाएगी।

राज्य के अधिकारियों ने बताया कि बैटरी स्टोरेज की तैनाती के लिए योजना बनाने का कार्य रणनीतिक रूप से किया जा रहा है, जिसमें रिन्यूएबल एनर्जी पैदा करने वाली जगहों के पास सिस्टम लगाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है।

इस तरीके का मकसद ट्रांसमिशन में होने वाले नुकसान को कम करना और एनर्जी की बर्बादी को रोकना है। साथ ही बिजली को बाहर निकालने और स्टोर करने की क्षमता को बेहतर बनाना है।

गुजरात एनर्जी ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन (जीईटीसीओ), राज्य की बिजली बांटने वाली कंपनियों के साथ मिलकर ग्रिड की क्षमता और कामकाज की जरूरतों के आधार पर सही जगहों की पहचान करने में लगा हुआ है।

अधिकारियों ने बताया कि स्टोरेज सिस्टम से दोहरी भूमिका निभाने की उम्मीद है – वे न सिर्फ ज्‍यादा बिजली को स्टोर करेंगे, बल्कि वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी को कंट्रोल करके ग्रिड की स्थिरता को भी बनाए रखने में मदद करेंगे, खासकर तब जब बिजली की मांग बहुत ज्‍यादा हो या लोड में अचानक उतार-चढ़ाव आए।

जरूरत पड़ने पर वे इमरजेंसी बैकअप सिस्टम के तौर पर भी काम करेंगे। यह विस्तार भारत के उस बड़े लक्ष्य के अनुरूप है जिसके तहत 2030 तक 500 गीगावॉट की नॉन-फॉसिल फ्यूज एनर्जी क्षमता हासिल करनी है।

बैटरी स्टोरेज इंफ़्रास्ट्रक्चर में गुजरात का बढ़ता निवेश, बिजली सप्लाई सिस्टम की विश्वसनीयता और स्थिरता को बनाए रखते हुए, रिन्यूएबल एनर्जी के ज्यादा इस्तेमाल को बढ़ावा देने के मकसद से किया जा रहा है।

–आईएएनएस

एएसएच/वीसी


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