ग्लोबल वैल्यू चेन से एशिया-प्रशांत में तेज विकास, रोजगार और गरीबी में कमी: एडीबी


नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने बुधवार को कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में रुकावट और तेजी से बदलती तकनीक अर्थव्यवस्थाओं के वैश्विक वैल्यू चेन में भाग लेने के तरीके को नया आकार दे रहे हैं।

एडीबी की ‘एशियन डेवलपमेंट पॉलिसी रिपोर्ट 2026’ के अनुसार, वैश्विक उत्पादन के अलग-अलग चरणों में विशेषज्ञता बढ़ने से एशिया और प्रशांत क्षेत्र ने पिछले 25 वर्षों में आर्थिक विकास हासिल किया है, रोजगार बढ़ाया है और गरीबी कम की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह क्षेत्र वैश्विक वैल्यू चेन व्यापार का करीब एक-तिहाई हिस्सा रखता है। विकासशील देशों की हिस्सेदारी 2000 में 9 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में 18 प्रतिशत हो गई है।

एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री अल्बर्ट पार्क ने कहा कि भू-आर्थिक विभाजन बढ़ने से कंपनियों के लिए वैश्विक वैल्यू चेन का लाभ उठाने के अवसर कम हो जाते हैं, जिससे औद्योगिकीकरण और आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि इस अंतर को कम करने के लिए कम विकसित देशों को नई तकनीकों का लाभ उठाने, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने और बेहतर बिजनेस माहौल बनाने में मदद देना जरूरी है, ताकि उनकी उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ सके।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पूर्वी और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देश वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में मजबूत स्थिति में हैं और ज्यादा मूल्य जोड़ने में सक्षम हैं। वहीं, कई छोटे, कम आय वाले या दूर-दराज के देश इन नेटवर्क से अभी भी काफी हद तक बाहर हैं।

उत्पादन के छोटे-छोटे हिस्सों में विशेषज्ञता ने वैश्विक बाजार में तेजी से जुड़ने में मदद की है, लेकिन इसका फायदा समान रूप से नहीं मिला है। बड़े और सक्षम उद्योगों को ज्यादा लाभ हुआ है, जबकि छोटे और मध्यम उद्यमों को ज्यादा लागत और सीमित संसाधनों के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

रिपोर्ट में वैश्विक वैल्यू चेन से जुड़ाव बढ़ाने के लिए तीन प्रमुख नीतिगत प्राथमिकताओं का जिक्र किया गया है।

पहला, मजबूती और लचीलापन अब प्रतिस्पर्धा का अहम हिस्सा बन गया है। अनिश्चितता बढ़ने के कारण विश्वसनीयता, तेजी से बदलाव के अनुसार ढलने की क्षमता और जोखिम प्रबंधन बहुत जरूरी हो गया है। इसके लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, लचीली कंपनियां और विविध बाजार व सप्लाई स्रोत जरूरी हैं।

दूसरा, पर्यावरणीय स्थिरता अब वैश्विक वैल्यू चेन में भागीदारी की शर्त बनती जा रही है। नए पर्यावरण मानकों का पालन करना जरूरी हो गया है, जिससे कंपनियां साफ और टिकाऊ तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगी।

तीसरा, समावेशी विकास भी बेहद जरूरी है। इसके लिए व्यापार लागत कम करना, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, खुले व्यापार नियम, कर्मचारियों के कौशल विकास और छोटे उद्योगों को फाइनेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म और निर्यात के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है।

रिपोर्ट के अनुसार, इन कदमों से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में संतुलित और टिकाऊ आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है।

–आईएएनएस

डीबीपी


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