बैक-ऑफिस से इनोवेशन हब तक पहुंच चुके हैं जीसीसी, विकसित भारत के लक्ष्य में निभाएंगे अहम भूमिका: श्रम मंत्रालय के अधिकारी


नई दिल्ली, 9 जुलाई (आईएएनएस)। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और रोजगार महानिदेशक अजय शर्मा ने गुरुवार को कहा कि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) अब केवल बैक-ऑफिस सपोर्ट यूनिट नहीं रह गए हैं। वे रिसर्च, डिजाइन और नवाचार (इनोवेशन) के बड़े केंद्र बन चुके हैं और भारत की अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के साथ-साथ ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में अजय शर्मा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जीसीसी सेक्टर ने तेजी से विकास किया है और अब ये केंद्र उच्च मूल्य वाले कार्यों, जैसे रिसर्च और डिजाइन, में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इससे वे वैल्यू चेन में काफी ऊपर पहुंच चुके हैं।

उन्होंने कहा, “जीसीसी हमारी अर्थव्यवस्था का एक बेहद महत्वपूर्ण स्तंभ है और पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र ने शानदार विकास किया है। यह बड़े बदलाव का दौर है। पहले जीसीसी को केवल कम लागत में बैक-ऑफिस का काम करने वाली इकाइयों के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। आज ये रिसर्च और डिजाइन जैसे उच्च स्तर के कार्य कर रहे हैं, जो वैल्यू चेन में कहीं अधिक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।”

अजय शर्मा ने कहा कि ऐसे समय में जब भारत तेज आर्थिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जीसीसी सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था का एक अहम आधार बनकर उभरा है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल सरकार ही नहीं, बल्कि उद्योग जगत और अन्य सभी हितधारक भी मिलकर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “अगर मैं जीसीसी सेक्टर की बात करूं, तो प्रधानमंत्री मोदी का ‘विकसित भारत’ का विजन ऐसा लक्ष्य है, जिस पर केवल सरकार ही नहीं, बल्कि उद्योग और सभी संबंधित पक्ष भी पूरी गंभीरता से काम कर रहे हैं।”

शर्मा ने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ (पूरी सरकार के समन्वित प्रयास) की जरूरत है, जिसके तहत सभी मंत्रालय आपसी तालमेल के साथ काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है। भारत के दीर्घकालिक विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए उद्योग जगत और सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।

उन्होंने कहा, “हर किसी को अपनी भूमिका निभानी होगी। जैसा कि मैंने पहले भी कहा, यह केवल सरकार का काम नहीं है। विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर मंत्रालय मिलकर काम कर रहा है। हम जिस भी परियोजना पर काम करते हैं, उसमें पूरी सरकार के समन्वित प्रयास की सोच अपनाई जाती है।”

–आईएएनएस

डीबीपी


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