‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के पारित न होने पर विपक्ष पर बरसे फडणवीस-शिंदे, बताया शर्मनाक

मुंबई, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित नहीं हो सका। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि बेहद शर्मनाक। आज पूरे देश ने विपक्ष का पाखंड देखा। उनके पास हमारी नारी शक्ति के साथ खड़े होने का ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन वे इसमें असफल रहे। उनके लिए महिला सशक्तिकरण केवल भाषणों और नारों तक ही सीमित है। उन्होंने प्रगति की जगह राजनीति को चुना। नारी शक्ति वंदन विधेयक के प्रति उनके विरोध ने यह उजागर कर दिया है कि वे वास्तव में किसके हितों की सेवा करते हैं।
उन्होंने आगे लिखा कि भारत की महिलाएं देख रही हैं और वे इसे नहीं भूलेंगी, लेकिन हमारे लिए महिला सशक्तिकरण केवल भाषणों तक सीमित नहीं है। यह एक प्रतिबद्धता है। हम कल से सड़कों पर उतरेंगे और हम अपनी नारी शक्ति को हर अधिकार, हर न्याय और हर सम्मान दिलाएंगे।
कोलकाता में उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि आज काला दिन है। प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतंत्र में नारी शक्ति की हिस्सेदारी सुनिश्चित की थी, लेकिन विपक्ष ने मिलकर इसे पारित नहीं होने दिया। संविधान में संशोधन नहीं हो पाया। विपक्ष का महिला विरोधी चेहरा सामने आया है।
उन्होंने कहा कि मुझे आश्चर्य लगता है कि ममता दीदी भी इसका विरोध करती हैं। कहीं न कहीं तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की महिलाएं इसका जवाब देंगी। कल से नारी शक्ति की लड़ाई शुरू होगी और तब तक जारी रहेगी, जब तक नारी शक्ति को महिला आरक्षण नहीं मिल जाता। उन्होंने राहुल गांधी के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्ष के लोग ढोल नगाड़े बजाकर डांस करें कि किस तरह हमें उनका अधिकार छीन लिया।
वहीं, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने लिखा कि लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ नामंजूर होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने गरीब, आदिवासी, पिछड़े, अनुसूचित जाति-जनजाति की माताओं और बहनों को संसद में आने से रोकने के लिए महिला-विरोधी रुख अपनाया। शिवसेना इसका तीव्र शब्दों में निषेध करती है।
उन्होंने आगे लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति को वंदन करने के लिए एक ऐतिहासिक प्रयास किया था, परंतु विरोधियों का महिलाओं के प्रति जो पूर्वाग्रह है, वह आज साफ दिखाई दिया। उनका असली और दुष्ट चेहरा आज सामने आ गया। यह देश के इतिहास का एक काला दिन साबित होगा। अब आने वाले समय में देश की हमारी लाडली बहनों का रुद्र रूप विरोधियों को देखने को मिलेगा।
वहीं, सांसद मिलिंद देओरा ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकसभा में स्पष्ट आश्वासन दिए जाने के बावजूद विपक्ष ने ऐतिहासिक संवैधानिक संशोधन का मात्र विरोध करने का विकल्प चुना, जबकि इस संशोधन के तहत 2029 तक लोकसभा और भारत की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाना था। शर्मनाक।
–आईएएनएस
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