भाजपा की पूरी राजनीतिक नींव मुसलमानों का विरोध करने पर टिकी: नसीम सिद्दीकी

मुंबई, 23 मई (आईएएनएस)। कांग्रेस के यूपी अध्यक्ष अजय राय द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई अमर्यादित टिप्पणी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस पर एनसीपी (एसपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने कहा कि राजनीति में असंसदीय भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए, लेकिन इसकी जननी भाजपा खुद है।
नसीम सिद्दीकी ने शनिवार को आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, “राजनीति में असंसदीय भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यह कोई अच्छी बात नहीं है और सभी को इससे बचना चाहिए। भारतीय राजनीति का स्तर बहुत नीचे गिरता जा रहा है, लेकिन इस चलन की शुरुआत भाजपा ने ही की है। जब से भाजपा सत्ता में आई है, उसने इस संस्कृति को बढ़ावा दिया है। संसद में भी भाजपा के सांसद इस तरह के कई अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल कर चुके हैं।”
इसी बातचीत के दौरान उन्होंने सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के रुख पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नमाज एक धार्मिक प्रार्थना है और हर धर्म में लोगों को कभी-कभी सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियां करनी पड़ती हैं, चाहे वह किसी त्योहार या भीड़भाड़ की स्थिति में हो।
उन्होंने कहा कि कई बार मंदिरों और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान भी लोग सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर इकट्ठा होते हैं। ऐसे में इसे पूरी तरह गलत नहीं ठहराया जा सकता। उनके मुताबिक यह अक्सर जगह की कमी और भीड़ की वजह से पैदा होने वाली स्थिति होती है, न कि किसी की इच्छा से किया गया कार्य।
नसीम सिद्दीकी ने आगे कहा कि धार्मिक आस्था को रोकना सही नहीं है और सभी को अपने-अपने तरीके से पूजा और प्रार्थना करने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंत में सभी को ईश्वर के पास ही जाना है, इसलिए इस तरह के मामलों में ज्यादा सख्ती उचित नहीं है।
उन्होंने कहा, “भाजपा की पूरी राजनीतिक नींव मुसलमानों का विरोध करने पर टिकी है। जिस दिन भाजपा मुसलमानों का विरोध करना, कुरान के खिलाफ, इस्लाम के खिलाफ और मस्जिदों के खिलाफ बोलना बंद कर देगी, उस दिन भाजपा का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। इसलिए, यह कोई बहुत हैरानी की बात नहीं है। असल में मैं तो यह कहूंगा कि भाजपा जिस तरह के कदम उठा रही है। वे वास्तव में मुसलमानों की तरक्की का ही रास्ता खोल रहे हैं।”
इसके अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश की 31,000 से ज्यादा वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किए जाने के मामले पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, “सरकार की नजरें लंबे समय से वक्फ संपत्तियों पर टिकी हुई हैं। एक बार किसी संपत्ति को वक्फ घोषित कर दिया जाए तो उसे बदला नहीं जा सकता। वक्फ का मतलब है कि कोई व्यक्ति या संस्था अपनी संपत्ति ईश्वर के नाम पर या समाज के लिए समर्पित कर देता है। सरकार की इस पर नजर है और उसे हथियाना चाहती है।”
–आईएएनएस
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