एआई और एग्री-स्टार्टअप्स बदल सकते हैं भारत की कृषि अर्थव्यवस्था, किसानों की आय बढ़ाने में निभाएंगे बड़ी भूमिका: डॉ. जितेंद्र सिंह


नई दिल्ली, 8 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीक और विज्ञान पर आधारित एग्री-स्टार्टअप्स भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि इससे खेती की उत्पादकता बढ़ेगी, किसानों की आय में सुधार होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में तकनीक, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहद जरूरी होगा।

मंत्री कहा कि कृषि क्षेत्र में तकनीक, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहद जरूरी होगा।

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है। वर्ष 2015 में जहां देश में लगभग 350 पंजीकृत स्टार्टअप थे, वहीं आज उनकी संख्या बढ़कर 2.3 लाख से अधिक हो गई है। इसके साथ ही भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि अब स्टार्टअप क्रांति का अगला चरण कृषि क्षेत्र से जुड़ा होना चाहिए। कृषि में नवाचार के जरिए सीधे किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है और ग्रामीण युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी तैयार किए जा सकते हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह धारणा बदलने की जरूरत है कि स्टार्टअप केवल सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र या बड़े शहरों तक सीमित हैं। उनके अनुसार, कृषि आज देश में उद्यमिता के सबसे बड़े अवसरों में से एक है।

उन्होंने कहा कि कई बार औपचारिक शैक्षणिक योग्यता से अधिक महत्वपूर्ण व्यावहारिक ज्ञान, नवाचार की सोच और सीखने की इच्छा होती है। उन्होंने बताया कि सरकार के सहयोग, वैज्ञानिक संस्थानों और डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म की मदद से अब आधुनिक तकनीकें ग्रामीण क्षेत्रों तक भी तेजी से पहुंच रही हैं।

कृषि में एआई की बढ़ती भूमिका पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब फसलों के पूर्वानुमान आधारित प्रबंधन, सटीक सिंचाई (प्रिसिजन इरिगेशन), मौसम-आधारित सलाह और कृषि संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बनता जा रहा है। उन्होंने अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि केवल एआई-आधारित बेहतर प्रबंधन से ही प्रत्येक किसान हर साल करीब 5,000 रुपए तक की बचत कर सकता है, जिससे देश की कृषि अर्थव्यवस्था में लगभग 70,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त मूल्य जुड़ सकता है।

मंत्री ने आगे कहा कि सैटेलाइट तकनीक, मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण, संसाधनों की मैपिंग और रियल-टाइम सलाह जैसी वैज्ञानिक प्रगति किसानों को बुआई, सिंचाई और फसल प्रबंधन से जुड़े बेहतर निर्णय लेने में मदद कर रही है। बेहतर मौसम पूर्वानुमान से किसान बदलते मानसून के अनुसार सही फसल का चयन कर सकते हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

जलवायु परिवर्तन को वैश्विक कृषि के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय जलवायु के अनुकूल फसलों, जीनोमिक्स, फसल सुधार, कीट-प्रतिरोधी किस्मों, प्रिसिजन फार्मिंग और संसाधनों के बेहतर उपयोग जैसे क्षेत्रों में व्यापक शोध को समर्थन दे रहा है। उनका कहना है कि इन प्रयासों से भारतीय कृषि को अधिक टिकाऊ, मजबूत और उत्पादक बनाया जा सकेगा।

–आईएएनएस

डीबीपी


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