दक्षिण चीन सागर विवाद: फिलीपींस के बाद ताइवान ने स्कारबोरो शोल पर जताया अधिकार


ताइपे, 2 अगस्त (आईएएनएस)। ताइवान सरकार ने रविवार को दक्षिण चीन सागर में मौजूद द्वीपों पर अपने संप्रभुता के दावे को फिर से दोहराया। यह बयान तब आया जब फिलीपींस ने स्कारबोरो शोल का एक आधिकारिक समुद्री नक्शा संयुक्त राष्ट्र (यूएन) को सौंपा।

ताइवान की सरकारी समाचार एजेंसी सीएनए के मुताब‍िक ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दक्षिण चीन सागर से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री कानून के तहत शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि ऐसे बहुपक्षीय विवाद के समाधान तंत्रों में ताइवान को भी शामिल किया जाना चाहिए।

ताइवान के विदेश मंत्रालय का यह बयान उस कदम के बाद आया है, जिसमें फिलीपींस ने पिछले हफ्ते स्कारबोरो शोल का आधिकारिक समुद्री नक्शा संयुक्त राष्ट्र को जमा कराया था ताकि मनीला, ताइपे और बीजिंग द्वारा दावा किए गए एटोल पर अपना दावा दोहराया जा सके।

जारी बयान में फिलीपींस के विदेश विभाग ने कहा, “यह जमा 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) के अनुच्छेद 16 के तहत किया गया है।” विभाग के अनुसार, समुद्री कानून के तहत तटीय देशों को उन आधिकारिक नक्शों को सार्वजनिक करना होता है, जिनमें उन बेसलाइन को दिखाया जाता है जिनसे उनके क्षेत्रीय समुद्र की चौड़ाई मापी जाती है।

स्कारबोरो शोल को फिलीपींस में ‘बाजो डे मासिनलोक’, ताइवान में ‘डेमोक्रेसी रीफ’ और चीन में ‘हुआंगयान दाओ’ कहा जाता है। इस क्षेत्र पर तीनों देशों का दावा है।

31 जुलाई को चीन के विदेश मंत्रालय ने हुआंगयान दाओ की तथाकथित ‘क्षेत्रीय समुद्री आधार रेखाओं’ के निर्धारण को लेकर फिलीपींस की आलोचना की। चीन ने इसे ‘गैरकानूनी, अमान्य और निरर्थक’ बताया।

चीन ने कहा कि फिलीपींस का यह कदम उसकी क्षेत्रीय संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन है और यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर तथा यूएनसीएलओएस समेत अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करता है।

चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, “चीन इस कदम को पूरी तरह खारिज करता है और इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा। हुआंगयान दाओ चीन का अभिन्न हिस्सा है। इस द्वीप और इसके आसपास के जलक्षेत्र पर चीन का निर्विवाद अधिकार है। चीन लंबे समय से इस क्षेत्र पर शांतिपूर्ण और प्रभावी ढंग से अपनी संप्रभुता और अधिकार का प्रयोग करता रहा है।”

बयान में कहा गया, “फिलीपींस की सीमाएं कई अंतरराष्ट्रीय संधियों के जरिए तय की गई हैं और हुआंगयान दाओ कभी भी उसका हिस्सा नहीं रहा है। इसलिए चीन के इस क्षेत्र पर फिलीपींस का दावा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पूरी तरह बेबुनियाद है।”

चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि फिलीपींस की ओर से एकतरफा तरीके से शुरू की गई ‘साउथ चाइना सी आर्बिट्रेशन’ अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों, जैसे पैक्टा संट सर्वंडा और एस्टॉपेल का उल्लंघन करती है। चीन के अनुसार, यह कदम यूएनसीएलओएस, चीन और फिलीपींस के बीच हुए द्विपक्षीय समझौतों तथा दक्षिण चीन सागर में पक्षों के आचरण संबंधी घोषणा (डीओसी) के भी खिलाफ है।

–आईएएनएस

एवाई/पीएम


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