संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधिमंडल के सामने भारत का विजन, सिबी जॉर्ज ने साझा किया बहुपक्षवाद पर विचार

नई दिल्ली, 2 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने रविवार को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के एक प्रतिनिधिमंडल के सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन किया और बहुपक्षवाद पर भारत के विचार साझा किए।
एमईए ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, “विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल के लिए स्वागत रात्रिभोज आयोजित किया। यह प्रतिनिधिमंडल भारत के एक सप्ताह के परिचयात्मक दौरे पर आया है। उन्होंने बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र को लेकर भारत के दृष्टिकोण को साझा किया और प्रतिनिधिमंडल के भारत प्रवास के सफल रहने की शुभकामनाएं दीं।”
जुलाई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में 2028-29 कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की गैर-स्थायी सदस्यता के लिए भारत के अभियान की शुरुआत की थी। इस दौरान उन्होंने एक ऐसे वैश्विक व्यवस्था के लिए भारत के विजन को सामने रखा, जो अधिक प्रतिनिधित्वकारी, प्रभावी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो।
वैश्विक शासन व्यवस्था पर भारत की व्यापक सोच को रेखांकित करते हुए जयशंकर ने कहा, “भारत का ध्यान एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और न्यायपूर्ण दुनिया के निर्माण पर रहेगा। ऐसी दुनिया, जहां ग्लोबल साउथ की आवाज को बराबरी से सुना जाए। ऐसी दुनिया, जहां शांति स्थापना (पीसकीपिंग) वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो। ऐसी दुनिया, जहां बहुपक्षवाद आज की वास्तविकताओं को दर्शाए और प्रभावी समाधान दे, सिर्फ आदर्शों तक सीमित न रहे। ऐसी दुनिया, जहां तकनीक की पूरी क्षमता का लाभ लोगों तक पहुंचे।”
उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण ‘शांति’ (सिक्योरिंग होलिस्टिक एडवांसमेंट थ्रू नॉर्म्स, ट्रस्ट एंड इंटीग्रिटी) के सिद्धांत पर आधारित होगा। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ग्लोबल साउथ की आवाज को और मजबूत बनाना है।
उन्होंने कहा कि भारत का रास्ता संवाद, सहयोग और देशों के बीच मतभेदों को कम करने के प्रयासों से तय होगा।
विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र की शांति स्थापना व्यवस्था को भविष्य के लिए और बेहतर बनाने की भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत ऐसे पीसकीपिंग ढांचे का समर्थन करेगा जो बेहतर संसाधनों से लैस हो, तकनीक का प्रभावी उपयोग करे, जमीनी जरूरतों के अनुसार काम करे और अपने मुख्य उद्देश्यों पर केंद्रित रहे।
उन्होंने कहा कि भारत महिलाओं, शांति और सुरक्षा एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा और महिला शांति सैनिकों की बड़ी भूमिका का समर्थन करेगा।
जयशंकर ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून, खासकर संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस), के अनुसार मुक्त, खुली और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को बढ़ावा देने को प्राथमिकता देगा।
–आईएएनएस
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