एथेनॉल ब्लेंडिंग भविष्य की जरूरत, वैज्ञानिक परीक्षणों और चरणबद्ध प्रक्रिया के बाद लागू हुई नीति: विशेषज्ञ


नई दिल्ली/बेंगलुरु (आईएएनएस)। देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20) को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच विशेषज्ञों और केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस नीति को बिना तैयारी के लागू नहीं किया गया है। उनका कहना है कि करीब 25 वर्षों तक वैज्ञानिक शोध, फील्ड ट्रायल और विभिन्न हितधारकों से व्यापक परामर्श के बाद ही ई20 पेट्रोल को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि स्वच्छ ईंधन और सतत विकास के वैश्विक लक्ष्यों को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी (आरजीआईपीटी) के प्रबंधन अध्ययन विभाग के पूर्व प्रमुख और पूर्व डीन (फैकल्टी अफेयर्स) प्रोफेसर संजय कुमार कर ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि किसी भी सरकारी नीति को लागू करने की एक तय प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि जैव ईंधन नीति भी विभिन्न हितधारकों से विस्तृत चर्चा और वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद बनाई गई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि यह नीति अचानक लागू कर दी गई।

उन्होंने बताया कि भारत में एथेनॉल मिश्रण की शुरुआत वर्ष 2001 में परीक्षण के तौर पर हुई थी, जबकि राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति 2018 में लागू की गई। अब 2026 तक इस पूरी प्रक्रिया को लगभग 25 वर्ष हो चुके हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी तकनीक को परिपक्व होने और व्यावहारिक रूप से सफल बनाने के लिए इतना लंबा समय पर्याप्त होता है। प्रोफेसर कर ने कहा कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (ई20) का लक्ष्य लगातार वैज्ञानिक प्रगति और सरकारों की नीतिगत सहायता के कारण संभव हो पाया है।

संजय कुमार कर ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उनके अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी-7) यानी स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा के उद्देश्य के अनुरूप है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति और 2022 में किए गए संशोधनों ने इस कार्यक्रम को नई गति दी है। उनके मुताबिक, आज 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल करना भारत की एक बड़ी उपलब्धि है, जो भविष्य में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस बीच, केंद्र सरकार ने गुरुवार को संसद में स्पष्ट किया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20) को देश भर में लागू करने से पहले व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण, प्रयोगशाला अध्ययन और वास्तविक परिस्थितियों में फील्ड ट्रायल किए गए थे।

लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम को लागू करने से पहले नीति आयोग, ऑटोमोबाइल कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी) और अन्य तकनीकी संस्थानों के साथ विस्तृत वैज्ञानिक परामर्श किया गया।

सरकार ने बताया कि ई20 पेट्रोल लागू करने से पहले एआरएआई, एसआईएएम, इंडियन ऑयल, आईआईपी और वाहन निर्माताओं ने इंजन की मजबूती, ड्राइविंग प्रदर्शन, स्टार्टिंग क्षमता, जंग-रोधी क्षमता, विभिन्न पुर्जों की अनुकूलता, उत्सर्जन स्तर और ईंधन दक्षता जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर व्यापक परीक्षण किए।

इन अध्ययनों में यह पाया गया कि निर्धारित मानकों के तहत ई20 पेट्रोल का उपयोग पूरी तरह सुरक्षित है। सरकार के अनुसार, परीक्षणों में पुराने और नए दोनों प्रकार के वाहनों के प्रदर्शन में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं पाई गई और न ही इंजन या अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों में किसी प्रकार की असामान्य घिसावट देखी गई।

–आईएएनएस

डीबीपी


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