नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: एनसीआर को वैश्विक एविएशन हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम


ग्रेटर नोएडा, 15 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के जेवर में तैयार हुआ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश के सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक है। लगभग 11,200 करोड़ रुपये की लागत से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित किया गया यह एयरपोर्ट भारत के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में शामिल है।

इसके संचालन से न केवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि इसे वैश्विक एविएशन हब के रूप में स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 नवंबर 2021 को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास किया था। एयरपोर्ट के विकास का कार्य स्विट्जरलैंड की कंपनी ज्यूरिख इंटरनेशनल एयरपोर्ट एजी को सौंपा गया।

पहले चरण के तहत 1334 हेक्टेयर क्षेत्र में निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जिस पर करीब 11 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। सभी चार चरणों के पूरा होने के बाद यह एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का छठा सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने का दावा करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने 28 मार्च को इसका उद्घाटन भी किया। शुरुआती चरण में यहां से देश के लगभग 45 शहरों के लिए करीब 65 वाणिज्यिक उड़ानें संचालित की जाएंगी।

एयरपोर्ट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी तेज और सुविधाजनक यात्री व्यवस्था है। यात्रियों को प्रवेश द्वार से बोर्डिंग गेट तक पहुंचने में 20 मिनट से भी कम समय लगेगा। सुरक्षा जांच के बाद केवल 60 मीटर का कॉरिडोर पार कर यात्री बोर्डिंग गेट तक पहुंच सकेंगे। कनेक्टिविटी के लिहाज से भी नोएडा एयरपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण है। यह यमुना एक्सप्रेस-वे के निकट स्थित है, जो ग्रेटर नोएडा और आगरा को सीधे जोड़ता है। एयरपोर्ट को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से भी जोड़ा जा रहा है।

इसके अलावा प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का स्टेशन भी एयरपोर्ट के पास प्रस्तावित है। गाजियाबाद से एयरपोर्ट तक 71.1 किलोमीटर लंबे आरआरटीएस कॉरिडोर के निर्माण की योजना है, जिसमें 11 स्टेशन होंगे और लगभग 16 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। लास्ट माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) ने बस सेवाएं शुरू कर दी हैं। महिंद्रा लॉजिस्टिक्स कैब सेवाओं के लिए ड्राइवर प्रशिक्षण, वाहन ट्रैकिंग और डिजिटल भुगतान व्यवस्था विकसित कर रहा है।

वहीं, उबर, रैपिडो और मेकमायट्रिप जैसी ऐप-आधारित सेवाएं भी संचालन के लिए तैयार हैं, जबकि ओला को भी लाइसेंस प्रदान किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, स्व-चालित और चालक-सहित कार रेंटल सेवाओं के लिए कई कंपनियों को लाइसेंस जारी किए गए हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के आर्थिक विकास, पर्यटन और निवेश को नई गति देने वाला साबित हो सकता है।

–आईएएनएस

पीकेटी/एएस


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