बांग्लादेश में खसरे का कहर, 24 घंटे में छह बच्चों की मौत, मृतकों का आंकड़ा 459 पहुंचा

ढाका, 17 मई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में रविवार सुबह आठ बजे तक पिछले 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों से छह और बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही देश में मृतकों की संख्या बढ़कर 459 हो गई है।
‘यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश’ (यूएनबी) ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (डीजीएचएस) ने इनमें से एक मौत को खसरे से जुड़ी बताया है, जबकि बाकी पांच मौतों को संदिग्ध माना गया है।
अब तक खसरे से होने वाली पक्की मौतों की संख्या 75 पहुंच गई है, जबकि 384 मौतों को संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है।
डीजीएचएस के आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटों में खसरे के 1,274 संदिग्ध मामले सामने आए। इसके साथ ही कुल मामलों की संख्या बढ़कर 57,846 हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, “पिछले 24 घंटों में खसरे के 243 नए पक्के मामले सामने आए, जिससे कुल संक्रमितों की संख्या 7,767 हो गई है।”
15 मार्च से अब तक 42,092 संदिग्ध मरीज अस्पताल में भर्ती किए गए हैं, जिनमें से 37,744 लोग ठीक होकर घर लौट चुके हैं।
शनिवार को भी बांग्लादेश में खसरे और खसरे जैसे लक्षणों से 12 बच्चों की मौत हुई थी। बांग्लादेश के प्रमुख अखबार ‘द डेली स्टार’ के अनुसार, इनमें से चार बच्चों में खसरे की पुष्टि हुई थी, जबकि बाकी आठ बच्चों में इस बीमारी जैसे लक्षण थे।
संक्रमण तेजी से फैलने के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बांग्लादेश सरकार से अपील की है कि वह चल रहे खसरा टीकाकरण अभियान को प्राथमिकता दे। साथ ही स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में ‘फीवर कॉर्नर’ (बुखार जांच केंद्र) बनाने की भी सलाह दी गई है, ताकि खसरा और निमोनिया जैसी बीमारियों का जल्दी पता लगाया जा सके।
यह अपील ढाका में बांग्लादेश लंग फाउंडेशन और चेस्ट एंड हार्ट एसोसिएशन ऑफ बांग्लादेश की ओर से आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई।
बुधवार को ‘सोचेतोन नागरिक समाज’ नाम के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने ढाका के धनमंडी 27 इलाके में मानव श्रृंखला बनाई। उन्होंने पूर्व अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और उनकी स्वास्थ्य सलाहकार नूरजहां बेगम के खिलाफ खसरे से हुई मौतों को लेकर कार्रवाई की मांग की। साथ ही पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई।
मार्च के मध्य से अब तक बांग्लादेश में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में इस पूरे मामले को ‘टाला जा सकने वाला संकट’ बताया गया। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि यूनुस के नेतृत्व वाली पिछली अंतरिम सरकार ने पहले से काम कर रही वैक्सीन खरीद व्यवस्था को खत्म कर दिया, लेकिन उसकी जगह नई व्यवस्था ठीक से खड़ी नहीं कर पाई।
–आईएएनएस
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