'ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट' राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम, भारत की समुद्र में बढ़ेगी निगरानी और ताकत : पीके श्रीवास्तव

भोपाल, 1 मई (आईएएनएस)। ‘ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट’ को लेकर देश में जारी बहस के बीच एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत्त) पीके श्रीवास्तव ने शुक्रवार को इसे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक क्षमता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट्स को केवल विकास के नजरिए से नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक हितों के संदर्भ में भी समझने की जरूरत है।
उन्होंने आईएएनएस से विशेष बातचीत में इस परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आधुनिक युद्ध और वैश्विक रणनीति का उदाहरण देते हुए कहा, “आज के समय में युद्ध केवल जमीन या सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि समुद्री मार्गों, हवाई क्षेत्र और तकनीकी क्षमता पर भी निर्भर करता है। किस तरह होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे समुद्री मार्गों पर नियंत्रण की चर्चा ने वैश्विक रणनीति को प्रभावित किया। इस तरह के समुद्री मार्गों का महत्व अत्यधिक होता है क्योंकि इनके जरिए दुनिया का बड़ा व्यापार संचालित होता है।”
उन्होंने कहा, “ग्रेट निकोबार द्वीप भारत को एक अनोखी रणनीतिक बढ़त देता है। यह द्वीप मलक्का जलडमरूमध्य के करीब स्थित है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाकर भारत न केवल समुद्री गतिविधियों की निगरानी बेहतर कर सकता है, बल्कि भविष्य में किसी भी संभावित संकट के दौरान अपनी स्थिति को और प्रभावी बना सकता है। इस परियोजना में कई महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं। इनमें एक आधुनिक एयरपोर्ट का निर्माण प्रस्तावित है, जिसका उपयोग नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इसके अलावा, एक गहरे पानी का बंदरगाह विकसित करने की योजना है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कंटेनर ट्रांसशिपमेंट सेवाएं प्रदान कर सकेगा। वर्तमान में भारत के पास ऐसा कोई बड़ा ट्रांसशिपमेंट हब नहीं है, जिसके कारण कई जहाज सिंगापुर और श्रीलंका जैसे देशों के बंदरगाहों से होकर गुजरते हैं, जिससे भारत को संभावित आर्थिक लाभ नहीं मिल पाता।”
उन्होंने जोर देकर कहा, “प्रस्तावित इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल बनने के बाद बड़े-बड़े वाणिज्यिक जहाज सीधे ग्रेट निकोबार पर रुक सकेंगे। इससे न केवल भारत की समुद्री व्यापार क्षमता बढ़ेगी, बल्कि देश को आर्थिक रूप से भी बड़ा लाभ होगा। यह प्रोजेक्ट भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार के नक्शे पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिला सकता है। भारत सरकार किसी भी बड़े प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले विशेषज्ञों की राय और विस्तृत सर्वेक्षण पर खास ध्यान देती है। इस तरह के प्रोजेक्ट्स केवल कागजों पर नहीं बनते, बल्कि संबंधित क्षेत्र में जाकर विस्तृत अध्ययन और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार की जाती हैं।”
उन्होंने विश्वास जताया कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के संदर्भ में भी सभी संभावित चुनौतियों और चिंताओं पर पहले ही विचार किया गया होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सभी को एकजुट होकर सोचने की आवश्यकता है। जब भी देश किसी महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम को आगे बढ़ाता है, तो आंतरिक विरोध कभी-कभी उन देशों के लिए लाभकारी हो सकता है, जो भारत की बढ़ती ताकत से असहज महसूस करते हैं। ऐसे में, राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देना जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की नीतियां दूरगामी दृष्टिकोण पर आधारित हैं। ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भी एक ऐसा ही कदम है, जिसका लाभ आने वाले वर्षों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। इस परियोजना के माध्यम से भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को ज्यादा मजबूत कर सकेगा।”
उन्होंने अंडमान और निकोबार कमांड का जिक्र करते हुए बताया, “पोर्ट ब्लेयर में पहले से ही भारत की एक महत्वपूर्ण सैन्य उपस्थिति मौजूद है। यदि ग्रेट निकोबार में भी एयरपोर्ट, बंदरगाह और सैन्य ढांचे का विकास होता है, तो यह पूरे क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को कई गुना मजबूत कर देगा। इससे समुद्री मार्गों पर निगरानी क्षमता बढ़ेगी और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देना संभव होगा। वैश्विक स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत को अपने रणनीतिक ठिकानों को मजबूत करना ही होगा। ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल सुरक्षा बल्कि आर्थिक विकास के लिहाज से भी बेहद अहम है।”
–आईएएनएस
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