नवीन पटनायक ने ओडिशा के सभी सांसदों को लिखा पत्र, कहा-परिसीमन से ओडिशा के हितों को पहुंच सकता है नुकसान

भुवनेश्वर, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को लेकर राज्य के सभी सांसदों को एक अहम पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने इस बिल को ओडिशा के राजनीतिक और आर्थिक हितों के लिए ‘गंभीर खतरा’ बताया है।
पत्र की शुरुआत में उन्होंने ओडिया नववर्ष और महाबिषुब संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे न केवल बीजू जनता दल के अध्यक्ष के रूप में बल्कि एक ओडिया होने के नाते राज्य के दीर्घकालिक हितों, सम्मान और समान प्रतिनिधित्व की रक्षा के लिए चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि अगर यह विधेयक संसद में पारित हो जाता है, तो ओडिशा के हितों को नुकसान पहुंच सकता है।
नवीन पटनायक ने साफ किया कि वे महिलाओं के सशक्तीकरण और विधायी संस्थाओं में उनके अधिक प्रतिनिधित्व के पूरी तरह समर्थक हैं। उन्होंने याद दिलाया कि उनके पिता बीजू पटनायक ने पंचायत स्तर पर महिलाओं के आरक्षण की शुरुआत की थी, जिसे उन्होंने आगे बढ़ाया। साथ ही, बीजेडी ने 2023 में महिला आरक्षण से जुड़े 106वें संविधान संशोधन विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) का भी समर्थन किया था।
हालांकि, उन्होंने कहा कि वर्तमान 131वां संशोधन विधेयक अपने घोषित उद्देश्य से आगे जाकर कई गंभीर चिंताएं पैदा करता है।
राजनीतिक पहलू पर उन्होंने कहा कि भारतीय संघीय व्यवस्था का आधार संतुलित प्रतिनिधित्व है। परिसीमन के जरिए इस संतुलन को बदलने से ओडिशा जैसे राज्यों की आवाज कमजोर हो सकती है। उन्होंने बताया कि इस बिल के लागू होने पर लोकसभा में ओडिशा की हिस्सेदारी 3.9 प्रतिशत से घटकर 3.4 प्रतिशत रह जाएगी। यह राज्य के लिए बड़ा नुकसान होगा और इसे उन शीर्ष 6 राज्यों में शामिल कर देगा, जिनकी हिस्सेदारी घटेगी।
उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है बल्कि ओडिशा के लोगों के भविष्य के प्रतिनिधित्व से जुड़ा मामला है।
उन्होंने कहा कि संसद में प्रतिनिधित्व केवल संख्या का मामला नहीं बल्कि पहचान, गर्व और अपनी भाषा व इतिहास की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने का माध्यम है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के बदलाव से लोगों में उपेक्षा की भावना पैदा हो सकती है।
महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना और इसे अगली जनगणना से जोड़ना दूरगामी असर डालेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ओडिशा जैसे राज्य, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण और मानव विकास में प्रगति की है, उन्हें इसके लिए ‘सजा’ मिल रही है।
उन्होंने कहा कि ज्यादा आबादी वाले राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ने से केंद्रीय संसाधनों और नीतियों का बंटवारा असंतुलित हो सकता है, जिससे ओडिशा के विकास और बुनियादी ढांचे पर असर पड़ेगा। उन्होंने याद दिलाया कि ओडिशा केंद्र को बड़ा राजस्व देता है लेकिन उसे अब तक विशेष राज्य का दर्जा भी नहीं मिला है।
–आईएएनएस
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