सुशील मोदी के निधन पर योगी ने जताया दुख

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के निधन पर सीएम योगी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने एक्स’पर पोस्ट अपने शोक संदेश में कहा,बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री, भाजपा परिवार के वरिष्ठ सदस्य सुशील कुमार मोदी जी का निधन अत्यंत दुःखद है। मेरी ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! उन्होंने देश और समाज की जीवनपर्यंत सेवा की। उनका संघर्ष कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा प्रेरणा का कार्य करेगा। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान और शोकाकुल परिजनों को यह अथाह दुःख सहने की शक्ति दें।

गले में कैंसर की बीमारी से पीड़ित रहे सुशील कुमार मोदी
सोमवार को नई दिल्ली में बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का निधन हो गया । वह 72 वर्ष के थे। मोदी गले में कैंसर की बीमारी से पीड़ति थे और उनका इलाज दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चल रहा था, वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली । उनके परिवार में उनकी पत्नी के अलावा दो पुत्र हैं । बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर इसकी पुष्टि की । उन्होंने लिखा,’बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी अब हमारे बीच नहीं रहे। पूरे भाजपा संगठन परिवार के साथ-साथ मेरे जैसे असंख्य कार्यकर्ताओं के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है। अपने संगठन कौशल, प्रशासनिक समझ और सामाजिक राजनीतिक विषयों पर गहरी जानकारी के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे। ईश्वर दिवंगत आत्मा को चिरशांति और परिजनों को इस शोक की घड़ी में संबल प्रदान करें।

सुशील मोदी का जीवन परिचय
बिहार की मौजूदा राजनीति, शासन-प्रशासन और अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी लोकनायक जय प्रकाश नारायण के आह्वान पर पटना विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर (एमएससी) की पढ़ाई बीच में ही छोड़ कर छात्र आंदोलन में शामिल हो गए थे। मोतीलाल मोदी और रत्ना देवी के घर में 05 जनवरी 1952 को जन्मे सुशील कुमार मोदी ने राम मोहन राय सेमिनरी, पटना से मैट्रिक प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया। पटना विश्वविद्यालय के पटना साइंस कॉलेज से स्नातक प्रतिष्ठा (वनस्पति विज्ञान) की डिग्री हासिल की। लेकिन, स्नातकोत्तर (वनस्पति विज्ञान) में पटना विश्वविद्यालय में नामांकन कराने के कुछ माह बाद ही जे.पी. के आह्वान पर पढ़ाई छोड़कर सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन (जे पी आंदोलन) में शामिल हो गए। जेपी आंदोलन से राजनीति में सक्रिय हुए श्री मोदी वर्ष 1971 में पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के पांच सदस्यीय कैबिनेट के सदस्य निर्वाचित हुए और वर्ष 1973 से 1977 तक पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के महामंत्री रहे।

एमएससी की पढ़ाई बीच में ही छोड़ छात्र आंदोलन में कूद पड़े थे सुशील
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव इसी छात्र संघ के निर्वाचित अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद संयुक्त सचिव थे। वे वर्ष 1977 से 1986 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के प्रदेश मंत्री और प्रदेश संगठन मंत्री, उत्तर प्रदेश-बिहार के क्षेत्रीय संगठन मंत्री रहे। वे विद्यार्थी परिषद् के तीन बार राष्ट्रीय महामंत्री रहे। वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के आजीवन सदस्य थे।

छात्र आन्दोलन के दौरान 5 दिन जेल में रहे
मोदी को जेपी आंदोलन और आपातकाल के दौरान पांच बार गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 1974 में बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में मीसा अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी, जिसके परिणामस्वरूप मीसा अधिनियम की धारा 9 को असंवैधानिक करार दिया गया। उन पर 1973 से 1977 तक एमआईएसए और कई अन्य अधिनियमों के तहत मामला दर्ज किया गया था। आपातकाल के दौरान उन्हें 30 जून 1975 को गिरफ्तार किया गया था और वे लगातार 19 महीने तक जेल में रहे थे।  जुझारू व्यक्तित्व वाले मोदी का आंदोलनों से गहरा नाता रहा है। वर्ष 1972 में पहली बार छात्र आन्दोलन के दौरान उन्हें 5 दिनों की जेल यात्रा करनी पड़ी। वे आपातकाल के 19 महीने की जेल यात्रा को मिलाकर कुल लगभग 24 माह जेल में रहे। वे बांकीपुर, फुलवारी, बक्सर, हजारीबाग, दरभंगा, भागलपुर जेल तथा पी.एम.सी.एच. कैदी वाडर् में कारा अवधि में बंद किए गए। उन्हें राम जन्म भूमि आन्दोलन के दौरान 10 दिनों के लिए जेल जाना पड़ा था। उनकी विदेशी घुसपैठ विरोधी असम आन्दोलन में सक्रिय भूमिका रही थी।  

962 में चीनी आक्रमण के दौरान आरएसएस के संपर्क
मोदी वर्ष 1962 में चीनी आक्रमण के दौरान आरएसएस के संपकर् में आए। उन्हें पटना की राजेन्द्र नगर सायं शाखा के मुख्य शिक्षक, पटना महानगर सायं कार्यवाह और जिला शारीरिक प्रमुख का दायित्व दिया गया। वे वर्ष 1977 से 1986 तक संघ के प्रचारक के नाते विद्यार्थी परिषद् के पूर्णकालिक कार्यकर्ता रहे।  वे राजनीति की समृद्ध विरासत छोड़ कर गए हैं। वे वर्ष 1990 में पटना केन्द्रीय विधान सभा क्षेत्र से 31,021 मत प्राप्त कर 3,113 मतों के अंतर से जीते। वर्ष 1995 में इसी क्षेत्र से 64,134 मत प्राप्त कर 32,099 मतों के अंतर से जीते। वर्ष 2000 में इसी क्षेत्र से 85,832 मत प्राप्त कर 66,069 मतों के अंतर से जीते। वे वर्ष 1996 से 2004 तक बिहार विधान सभा में प्रतिपेक्ष के नेता रहे।  मोदी ने वर्ष 2004 में भागलपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और तीन लाख 45 हजार मत प्राप्त किया और अपने प्रतिद्वंदी को एक लाख 17 हजार मतों के अंतर से पराजित किया था।

नीतीश की सरकार में उप मुख्यमंत्री  बने
उन्होंने वर्ष 2005 में बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनाने के लिए लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया और बिहार विधान परिषद् का सदस्य निर्वाचित हुए। वे वर्ष 2012 में दूसरी बार बिहार विधान परिषद् का सदस्य चुने गए। वर्ष 1990 में उन्हें भाजपा बिहार विधानमंडल दल का मुख्य सचेतक बनाया गया। वर्ष 1996 से 2004 तक वह राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे। उन्होंने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ पटना उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की, जिसे बाद में चारा घोटाले के नाम से जाना गया। वे वर्ष 2000 में नीतीश कुमार सरकार में संसदीय कार्य मंत्री थे। उन्होंने झारखंड राज्य के गठन का समर्थन किया था। वर्ष 2005 में नीतीश कुमार की फिर से बनी सरकार में उन्हें उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री की ज़म्मिेवारी सौंपी गई।  

एनडीए की जीत के बाद फिर बने  बिहार के उपमुख्यमंत्री
बिहार में 2010 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद वह फिर बिहार के उपमुख्यमंत्री बने। वर्ष 2017 में बिहार में जदयू-राजद की महागठबंधन सरकार के पतन में  मोदी की अहम भूमिका मानी जाती है। उन्होंने कथित बेनामी संपत्तियों और अनियमित वित्तीय लेनदेन को लेकर चार महीने तक राजद प्रमुख लालू प्रसाद और उनके परिवार के खिलाफ लगातार हमला बोला था। वे लगभग 11 वर्षों तक नीतीश सरकार में उप मुख्यमंत्री रहे और इस जोड़ी को बिहार के राजनीतिक हलकों में ‘राम-लक्ष्मण’ की जोड़ी के रूप में जाना जाता रहा ।   रामविलास पासवान के 08 दिसंबर 2020 को निधन के बाद खाली हुई सीट को भरने के लिए  मोदी को बिहार से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुना गया।वह देश के उन नेताओं में से एक थे जो राज्यसभा, लोकसभा,विधान परिषद, विधान सभा के सदस्य रहे।  मोदी भारत में समलैंगिक विवाह को वैध बनाने के प्रयासों के विरोधी थे। उन्होंने इस विचार के समर्थकों को ‘वामपंथी-उदारवादी’ बताया, जो ‘पश्चिम की नकल करना और भारतीय जनता पर ऐसे कानून थोपना’ चाहते हैं।उन्होंने तकर् दिया कि भारत में समलैंगिक विवाह को वैध बनाने से ‘देश में व्यक्तिगत कानूनों का नाजुक संतुलन पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।

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