विश्व बौद्धिक संपदा दिवस: इनोवेशन और रचनात्मकता को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण अवसर


नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। हर साल 26 अप्रैल को विश्व बौद्धिक संपदा दिवस या वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी डे मनाया जाता है। यह दिन आविष्कारकों, रचनाकारों और उद्यमियों के योगदान को सम्मान देने व बौद्धिक संपदा के महत्व के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है।

साल 2000 में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) के सदस्य देशों ने 26 अप्रैल को इसे दिवस के रूप में घोषित किया था। इस तारीख को इसलिए चुना गया क्योंकि 26 अप्रैल 1970 को डब्ल्यूआईपीओ कन्वेंशन लागू हुआ था।

अब सवाल है कि विश्व बौद्धिक संपदा दिवस क्यों मनाया जाता है? इस दिवस का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के लोगों को बौद्धिक संपदा अधिकारों के बारे में जागरूक करना है। बौद्धिक संपदा में पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, औद्योगिक डिजाइन और व्यापारिक सूत्र शामिल हैं। ये अधिकार नवाचार और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करते हैं व आविष्कारकों, कलाकारों, डिजाइनरों और व्यवसायों को उनके सृजन का उचित लाभ और सुरक्षा प्रदान करते हैं।

यह दिवस यह समझने का अवसर भी प्रदान करता है कि एक संतुलित बौद्धिक संपदा सिस्टम कैसे वैश्विक कला जगत को फलने-फूलने में मदद करती है और मानव प्रगति को गति देने वाले तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देती है।

विश्व बौद्धिक संपदा दिवस 2026 के थीम की बात करें तो बौद्धिक संपदा और खेल विश्व बौद्धिक संपदा संगठन ने साल 2026 के लिए थीम ‘बौद्धिक संपदा और खेल: तैयार हो जाओ, शुरू करो, नवाचार करो’ घोषित कर दिया है। इस थीम के तहत इस बार खेल जगत में बौद्धिक संपदा की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आधुनिक खेल उपकरणों, क्रांतिकारी प्रौद्योगिकियों, ब्रांड्स और डिजाइन्स से लेकर खेल संस्कृति को आकार देने वाले सभी नवाचारों में बौद्धिक संपदा अधिकारों की अहम भूमिका होती है।

यह थीम दर्शाता है कि बौद्धिक संपदा कैसे खेल जगत में रचनात्मकता और इनोवेशन को बढ़ावा देती है व दुनिया भर के लोगों को प्रेरित करके जोड़ती है। इस दिन उन सभी रचनाकारों, आविष्कारकों और उद्यमियों का जश्न मनाया जाता है जिनके विचार और जुनून से खेलों का भविष्य बेहतर और रोमांचक बन रहा है।

विश्व बौद्धिक संपदा दिवस का मुख्य उद्देश्य बौद्धिक संपदा अधिकारों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना, इनोवेशन और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना, आविष्कारकों और कलाकारों के अधिकारों की रक्षा करना, समाज को यह समझाना कि बौद्धिक संपदा कैसे आर्थिक विकास और सांस्कृतिक प्रगति में योगदान देती है।

–आईएएनएस

एमटी/डीकेपी


Show More
Back to top button