ट्रंप-स्टार्मर में बढ़ती दूरी के बीच किंग चार्ल्स जाएंगे अमेरिका, क्या ये डैमेज कंट्रोल की कोशिश?


लंदन, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया संकट के बीच बकिंघम पैलेस ने किंग चार्ल्स तृतीय के अमेरिका दौरे की घोषणा की है। पैलेस ने बताया कि किंग की चार दिवसीय स्टेट विजिट 27 अप्रैल से शुरू होगी। ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान संघर्ष को लेकर असहमति सुर्खियों में है। ऐसे हालात में किंग के दौरे को लेकर कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

बकिंघम पैलेस ने बताया कि किंग चार्ल्स तृतीय अपने पहले आधिकारिक दौरे पर अमेरिकी संसद के दोनों सदनों को संबोधित करेंगे। भाषण ऐसा होगा जिसमें “साझा इतिहास” की बात होगी। किंग के साथ क्वीन कैमिल भी होंगी।

पैलेस ने जो बयान जारी किया है उसके मुताबिक ये दौरा, “हम दोनों देशों के साझा इतिहास” के साथ-साथ मौजूदा रिश्तों को भी “बड़ी” पहचान देगा।

ईरान संघर्ष को लेकर ट्रंप और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच खुली असहमति छुपी हुई बात नहीं है। ब्रिटिश मीडिया का दावा है कि मौजूदा हालात के मद्देनजर कुछ ब्रिटिश नेताओं ने किंग से यात्रा रद्द करने की सिफारिश की थी।

स्टार्मर का बयान भी अहम है। जिन्होंने सोमवार को कहा कि हो सकता है यात्रा “बहुत जरूरी” होगी, और भरोसा भी दिलाया कि राजशाही की ओर से बनाए रिश्ते “दशकों तक चल सकते हैं”।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी अपनी खुशी का इजहार ट्रुथ सोशल पर किया। कहा वाकई यह यात्रा “बहुत शानदार होगी”।

अमेरिकी स्पीकर माइक जॉनसन ने बताया कि चार्ल्स 28 अप्रैल को कांग्रेस को संबोधित करेंगे, हालांकि बकिंघम पैलेस ने तय भाषण की निश्चित तारीख का खुलासा नहीं किया।

गल्फ वॉर के तुरंत बाद 1991 में एलिजाबेथ द्वितीय ने कांग्रेस को संबोधित किया था। अब बेटे चार्ल्स बतौर राजा वही जिम्मेदारी निभाएंगे।

वॉशिंगटन में, राजा और कैमिला, ट्रंप और फर्स्ट लेडी मेलानिया के साथ समय बिताएंगे। फिर एक स्टेट डिनर और मिलिट्री रिव्यू में शामिल होंगे।

शाही जोड़े ने सितंबर में ट्रंप की एक शानदार स्टेट विजिट पर मेजबानी की थी, जिसमें विंडसर कैसल में डिनर भी शामिल था।

ये दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब ट्रंप और स्टार्मर के मतभेद जगजाहिर हो गए हैं। ईरान संघर्ष के दौरान अपनी मदद न करने का आरोप ट्रंप बार-बार कीर स्टार्मर पर लगाते रहे हैं। संघर्ष की शुरुआत में ब्रिटेन और अमेरिका इस मुद्दे पर सहमत नहीं थे। जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर शुरुआती सैन्य कार्रवाई की योजना बनाई, तब कीर स्टार्मर ने अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।ब्रिटेन के इस फैसले को उस समय अमेरिका के लिए झटका माना गया था, और ट्रंप ने तल्ख टिप्पणी भी की थी।

–आईएएनएस

केआर/


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