अमेरिका-ईरान संघर्ष की पृष्ठभूमि में इजरायल और लेबनान के बीच बातचीत, जानें क्या हैं इसके मायने?
नई दिल्ली, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान और अमेरिका में जारी भीषण तनाव के बीच इजरायल और लेबनान में भी बातचीत हो रही है। लगभग 33 सालों में पहली बार लेबनान और इजरायल के बीच ये सीधी वार्ता है। इजरायल-लेबनान में वार्ता ऐसे समय में हो रही है, जब ईरान के साथ अमेरिका के संघर्ष जारी हैं और पहले राउंड की बातचीत बेनतीजा रही। आइए जानते हैं कि ईरान-अमेरिका तनाव के बीच लेबनान और इजरायल के बीच बातचीत के मायने क्या हैं।
मौजूदा हालात के बीच इजरायल और लेबनान की इस वार्ता को एक बड़े कूटनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि दोनों देशों के बीच इस बातचीत की मध्यस्थता अमेरिका कर रहा है। अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो की मध्यस्थता में दोनों देशों के राजनयिकों के साथ यह बैठक की।
लेबनान और इजरायल के बीच लंबे समय से तनाव जारी है। खासतौर से ईरान के साथ संघर्ष के बीच दक्षिणी लेबनान में स्थित हिजबुल्लाह ने इजरायल के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं। इससे पहले 7 अक्टूबर 2023 में इजरायल पर हमास के हमलों के दौरान भी हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमले किए थे।
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। खामेनेई के साथ-साथ इस हमले में ईरान के कई अन्य शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया। अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान कई मोर्चों पर कमजोर हुआ है।
एक तरफ अमेरिका ईरान के साथ संघर्ष खत्म करने के लिए बातचीत की कोशिश कर रहा है। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच पाकिस्तान में पहले राउंड की वार्ता हुई, जिसका कोई नतीजा नहीं निकला। ईरान ने अमेरिका की शर्तें मानने से इनकार कर दिया। ऐसे में इजरायल और लेबनान के बीच बातचीत हो रही है। दरअसल, दक्षिणी लेबनान में स्थित हिजबुल्लाह ईरान का प्रॉक्सी है। ऐसे में लेबनान के साथ कूटनीतिक बातचीत के जरिए अमेरिका और इजरायल ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
लेबनान और इजरायल के बीच अगर बात बन जाती है, तो हिजबुल्लाह के प्रभाव को कम किया जा सकेगा। इससे पहले भी लेबनानी सरकार ने हिजबुल्लाह की ओर से इजरायल पर किए गए हमलों की आलोचना की है। हिजबुल्लाह पर शिकंजा कसने के लिए लेबनानी सरकार ने हाल ही में गैर-सरकारी हथियार हटाने का आदेश दिया था। लेबनानी सरकार के इस कदम की इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सराहना भी की थी।
अमेरिका और इजरायल ईरान को कई मोर्चों पर घेरने की तैयारी कर रहा है। एक तरफ लेबनानी सरकार के साथ कूटनीतिक बातचीत के जरिए हिजबुल्लाह के जरिए ईरान को घेरने की कोशिश हो रही है, तो दूसरी तरफ होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी पोर्ट से आने-जाने वाले जहाजों के ब्लॉकेड का काम किया जा रहा है।
चूंकि, इजरायल ने एक बात साफ कर दी है कि अमेरिका और ईरान के बीच जो सीजफायर को लेकर वार्ता हुई या होने वाली है और जो पहले दो हफ्तों के लिए जो सीजफायर हुआ, वह लेबनान पर लागू नहीं होगा। अब इससे एक बात तो साफ है कि इजरायल लेबनान पर हमले जारी रखेगा। भले ही इजरायल इन हमलों में हिज्बुल्लाह को निशाना बना रहा है, लेकिन इसमें नुकसान लेबनान के लोगों और देश की संपत्ति का भी हो रहा है। ऐसे में लेबनान इस दबाव में आसानी से आ सकता है, जिससे हिज्बुल्लाह को निहत्था किया जा सकेगा।
वहीं अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो ने इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर को लेकर कहा, “हम दो ऐसे देशों के साथ जुड़कर बहुत सम्मानित महसूस कर रहे हैं जिनके साथ अमेरिका मजबूत संबंध बनाना चाहता है और जाहिर है कि हम इस भूमिका में मदद करके बहुत खुश हैं। यह एक ऐतिहासिक मौका है। हम समझते हैं कि हम दशकों के इतिहास और मुश्किलों के खिलाफ काम कर रहे हैं, जिन्होंने हमें इस खास पल तक पहुंचाया है।”
रुबियो ने कहा कि यह दो देशों के बीच सीजफायर से कहीं ज्यादा है। उन्होंने कहा, “यह दुनिया के इस हिस्से में हिज्बुल्लाह के 20 या 30 साल के असर को हमेशा के लिए खत्म करने के बारे में है और सिर्फ इजरायल को हुए नुकसान के बारे में नहीं, बल्कि लेबनान के लोगों को हुए नुकसान के बारे में भी है। हमें याद रखना होगा कि लेबनान के लोग हिज्बुल्लाह के शिकार हैं। लेबनान के लोग ईरानी हमले के शिकार हैं। और इसे रोकने की जरूरत है।”
मार्को रुबियो ने आगे कहा, “इस मामले की सारी मुश्किलें अगले छह घंटों में हल नहीं होने वाली हैं। लेकिन हम आगे बढ़कर ऐसा फ्रेमवर्क बना सकते हैं जहां कुछ हो सके – कुछ बहुत स्थायी और सकारात्मक, ताकि लेबनान के लोगों को वैसा भविष्य मिल सके जिसके वे हकदार हैं और इजरायल के लोग ईरान के टेररिस्ट प्रॉक्सी से रॉकेट हमलों के डर के बिना जी सकें।”
–आईएएनएस
केके/एएस