जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर एक्शन पर रोक स्वागतयोग्य : मुफ्ती इस्माइल

मुंबई, 28 जुलाई (आईएएनएस)। एआईएमआईएम विधायक मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल ने जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई पर लगी अस्थायी रोक, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए असदुद्दीन ओवैसी द्वारा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को दिए गए गठबंधन प्रस्ताव, वंदे मातरम के अपमान पर प्रस्तावित विधेयक और कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध-प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दर्ज मामलों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी।
जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई पर लगी अस्थायी रोक का स्वागत करते हुए मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल ने इसे पूरे देश के लिए राहत भरी खबर बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़ा यह मामला लंबे समय से देशभर में चिंता का विषय बना हुआ था। जब वर्षों पहले यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई थी, तब रामपुर विकास प्राधिकरण से जुड़े वर्तमान नियम और नक्शा स्वीकृति की व्यवस्था उस स्वरूप में मौजूद नहीं थी। इसी आधार पर जिला प्रशासन द्वारा विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था, जिससे शिक्षा जगत और आम लोगों के बीच बेचैनी का माहौल बन गया था।
उन्होंने कहा कि यदि संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई पर रोक लगाई गई है, तो यह उन सभी लोगों के लिए अच्छी खबर है जो शिक्षा के क्षेत्र में रुचि रखते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी प्रकार के धार्मिक भेदभाव या नफरत का माहौल नहीं बनना चाहिए और शिक्षा संस्थानों को ऐसे विवादों से दूर रखा जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी द्वारा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को गठबंधन का प्रस्ताव दिए जाने पर मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल ने कहा कि ओवैसी पहले भी विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की पहल करते रहे हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान भी ओवैसी ने अन्य राजनीतिक दलों से गठबंधन के लिए बातचीत की थी, लेकिन उस समय उनके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया। एआईएमआईएम पर अक्सर लगाए जाने वाले आरोपों का जवाब देने के लिए ओवैसी ने व्यावहारिक राजनीति का रास्ता अपनाया है। यदि भाजपा को रोकना है तो समान विचारधारा वाले दलों को साथ आकर चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि अखिलेश यादव को इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करना चाहिए, ताकि विपक्षी वोटों का बिखराव रोका जा सके।
वंदे मातरम के अपमान पर प्रस्तावित विधेयक के संबंध में पूछे जाने पर मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल ने कहा कि जब यह विधेयक सदन में पेश होगा, तब संविधान के दायरे में रहते हुए विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग अपनी बात रखेंगे। इस विषय पर विस्तृत प्रतिक्रिया विधेयक सामने आने के बाद ही दी जाएगी।
सीजेपी के प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों और सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश, जिसमें 18 वर्ष से कम आयु के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है उन्हें तत्काल रिहा करने की बात कही गई है, पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह आंदोलन नीट परीक्षा पेपर लीक और अन्य राज्यों में हुए पेपर लीक के मामलों को लेकर चलाया गया था। आंदोलन के दौरान सरकार और आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों के बीच जो सहमति बनी थी, उसी के अनुरूप कार्रवाई होनी चाहिए। बाद में नई-नई शर्तें जोड़ना उचित नहीं है। यदि पहले से तय सहमति के बाद अब अलग-अलग आधारों पर शर्तें लगाई जा रही हैं, तो यह सही तरीका नहीं माना जा सकता।
–आईएएनएस
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