रिपोर्ट: कृषि क्षेत्र की गहरी कमजोरियों के कारण पाकिस्तान में खाद्य असुरक्षा गंभीर, शीर्ष 10 देशों में शामिल


इस्लामाबाद, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक नई रिपोर्ट में पाकिस्तान को उन 10 देशों में शामिल किया गया है, जहां अत्याधिक खाद्य असुरक्षा सबसे अधिक केंद्रित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में खाद्य असुरक्षा की गंभीर स्थिति देश के कृषि क्षेत्र की गहरी जड़ें जमा चुकी कमजोरियों, बार-बार आने वाले जलवायु संकटों और लगातार आर्थिक अस्थिरता का परिणाम है।

‘ग्लोबल रिपोर्ट ऑन फूड क्राइसिस 2026’ के अनुसार, पाकिस्तान में खाद्य असुरक्षा अस्थायी या चक्रीय नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और संरचनात्मक समस्या बन चुकी है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2025 में पिछले साल की तुलना में सबसे गंभीर श्रेणियों में आने वाले लोगों की संख्या कुछ कम हुई है, जिससे संकेत मिलता है कि आपातकालीन राहत उपायों और कीमतों में कुछ स्थिरता का असर पड़ा हो सकता है।

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन के संपादकीय में कहा गया है कि बड़े कृषि आधार वाले देश के लिए यह निष्कर्ष चौंकाने वाला लग सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है। पाकिस्तान में खाद्य असुरक्षा का यह स्तर कृषि व्यवस्था की पुरानी कमजोरियों का अनुमानित नतीजा है, जिसे जलवायु आपदाओं और आर्थिक संकटों ने और बढ़ा दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में 1.1 करोड़ से अधिक लोग अब भी तीव्र खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। इनमें 93 लाख लोग “संकट” की स्थिति में हैं, जबकि 17 लाख लोग “आपातकाल” श्रेणी में हैं। यह आंकड़ा बताता है कि देश की सामाजिक और आर्थिक सहनशीलता बहुत सीमित रह गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु अस्थिरता पाकिस्तान में संकट को और बढ़ाने वाला प्रमुख कारक बनी हुई है। बार-बार आने वाली बाढ़ और चरम मौसम घटनाओं से फसलें बर्बाद हुई हैं और ग्रामीण आजीविका प्रभावित हुई है। इसके कारण कमजोर आबादी संपत्तियां बेचने, कर्ज लेने और दूसरों पर निर्भर होने के दुष्चक्र में फंसती जा रही है।

इन झटकों का सबसे ज्यादा असर बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध प्रांतों में देखा गया है, जहां पहले से ही गरीबी और पिछड़ापन स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण और स्वच्छ पानी तक पहुंच को सीमित करता है।

संपादकीय के अनुसार, खाद्य असुरक्षा का असर पाकिस्तान की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। बढ़ता खाद्य आयात बिल पहले से दबाव झेल रहे विदेशी मुद्रा खाते पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। वहीं, कुपोषित श्रमबल उत्पादकता और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को प्रभावित कर रहा है।

‘ग्लोबल रिपोर्ट ऑन फूड क्राइसिस 2026’ में पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान, बांग्लादेश, कांगो, म्यांमार, नाइजीरिया, दक्षिण सूडान, सूडान, सीरिया और यमन को तीव्र भूख के प्रमुख केंद्रों में शामिल किया गया है।

रिपोर्ट में पाकिस्तान को कुपोषण जोखिम वाले देशों की सूची में भी रखा गया है, जहां भोजन की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, पानी और स्वच्छता सुविधाओं की कमी तथा बीमारियों से जुड़ी गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं। डॉन के मुताबिक, रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2026 में पाकिस्तान में महंगाई दर 6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जिससे हालात पर और दबाव बढ़ेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष 10 देशों में पाकिस्तान का शामिल होना जरूरतों की गंभीरता और आंकड़ों के दायरे के विस्तार दोनों को दर्शाता है। वर्ष 2024 में जहां 43 ग्रामीण जिलों का विश्लेषण किया गया था, वहीं 2025 में इसे बढ़ाकर 68 जिलों तक कर दिया गया। इसमें बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध के कई क्षेत्र शामिल किए गए, जिससे विश्लेषण में शामिल आबादी 16 प्रतिशत से बढ़कर 21 प्रतिशत हो गई और 1.4 करोड़ से अधिक नए लोग आंकड़ों में जुड़े।

–आईएएनएस

डीएससी


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