ईरान और लेबनान में सीजफायर कूटनीतिक कोशिशों के जरिए बनाए रखना होगा: ईसी अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर
नई दिल्ली, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर के बाद दोनों पक्षों के बीच स्थायी समाधान की कूटनीतिक कोशिशों लगातार जारी है। दोनों पक्षों के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत हो रही है, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकल पाया है। इस पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि ईरान और लेबनान में सीजफायर को कूटनीतिक कोशिशों से बनाए रखना होगा।
उन्होंने आगे कहा, “हमारा लक्ष्य युद्ध को हमेशा के लिए खत्म होते देखना है और होर्मुज स्ट्रेट में बिना किसी फीस के नेविगेशन की पूरी आजादी वापस लाना है।”
उन्होंने कहा कि किसी भी शांति समझौते में ईरान के न्यूक्लियर और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर ध्यान देना चाहिए। मिडिल ईस्ट में युद्ध के नतीजे यूरोप में आर्थिक सुरक्षा पर असर डाल सकते हैं।
ईरान के मेहर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के यूएन दूत आमिर सईद इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को चेतावनी दी है कि इजरायल क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए एक लगातार और गंभीर खतरा बना हुआ है। इस दौरान उन्होंने इजरायल के सीजफायर उल्लंघन और सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का जिक्र किया।
ईरानी दूत ने कहा कि पश्चिम एशिया में असली कलेक्टिव सिक्योरिटी पाने के लिए एक एकजुट जवाब की जरूरत है जो अस्थिरता के मुख्य सोर्स यानी इजरायल के कब्जे वाले शासन से सीधे तौर पर निपटे।
उन्होंने कहा, “सुरक्षा परिषद को इजरायल को लेबनान में सीजफायर को पूरी तरह से बनाए रखने, सिविलियन और सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर सभी हमलों को तुरंत रोकने और अपनी सभी कब्जे वाली सेनाओं को वापस बुलाने के लिए मजबूर करने के लिए निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए।”
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने इजरायली हमले की निंदा की है जिसमें तीन सिविल डिफेंस के लोग मारे गए। मारे गए नागरिक सुरक्षाकर्मी इजरायल की ओर से पहले किए गए हमले में घायल हुए लोगों को बचाने का काम कर रहे थे।
लेबनान की सरकारी नेशनल न्यूज एजेंसी के मुताबिक राष्ट्रपति आउन ने कहा, “यह हमला राहत और फर्स्ट एड वर्कर्स को निशाना बनाकर किए गए हमलों की सीरीज में एक और हमला है, जो दिखाता है कि इजरायल उन अंतरराष्ट्रीय कानूनों और चार्टर्स का उल्लंघन करना जारी रखे हुए है जो आम लोगों, पैरामेडिक्स, सिविल डिफेंस और रेड क्रॉस के लोगों की रक्षा करते हैं।”
–आईएएनएस
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