लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण जरूरी, बाल यौन शोषण सामग्री हटाने की एसओपी का स्वागत: प्रवीण खंडेलवाल


नई दिल्ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के प्रावधान, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री हटाने के लिए केंद्र सरकार की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा समाजवादी पार्टी पर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी।

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के तहत लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण संबंधी प्रावधान पर प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि यदि सर्वोच्च न्यायालय ने लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता दी है, तो उसका पंजीकरण भी आवश्यक होना चाहिए। पंजीकरण से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि ऐसे संबंध कानून और न्यायालय की भावना के अनुरूप स्थापित हुए हैं। इससे संबंधित पक्षों के अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी और भविष्य में उत्पन्न होने वाले कानूनी विवादों को कम करने में मदद मिलेगी। इस प्रकार के प्रावधान को शामिल करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के प्रयासों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक सकारात्मक और आवश्यक कदम है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा समाजवादी पार्टी पर लगाए गए आरोपों के संबंध में भाजपा सांसद ने कहा कि अतीत में समाजवादी पार्टी ने भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे और हिंदू धार्मिक आस्थाओं के प्रति उनका रवैया विवादों में रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने राजनीतिक कारणों से एक वर्ग विशेष को खुश करने की कोशिश में धार्मिक भावनाओं की उपेक्षा की। आज यदि वही लोग राम मंदिर और आस्था की बात कर रहे हैं तो यह उनके पुराने रुख के विपरीत है। यह स्थिति उस कहावत जैसी है कि ‘900 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली’। जनता राजनीतिक दलों के पुराने और वर्तमान रुख दोनों को देख रही है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बाल यौन शोषण सामग्री हटाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी किए जाने के फैसले का प्रवीण खंडेलवाल ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की सामग्री भारतीय समाज के संस्कारों और सामाजिक मूल्यों के खिलाफ है। बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री का प्रसार एक गंभीर सामाजिक और कानूनी अपराध है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार का यह कदम समाज में सकारात्मक संदेश देगा और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही भी बढ़ाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और इस प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सरकार, समाज और सभी संबंधित संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा। इस पहल से बाल यौन शोषण जैसी गंभीर समस्या की रोकथाम के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी तथा डिजिटल मंचों को बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा।

–आईएएनएस

पीएसके


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