राम मंदिर दान प्रकरण: विपक्ष ने एफआईआर पर उठाए सवाल, कहा- 'बड़ी मछलियों को बचाने की हो रही कोशिश'

नई दिल्ली, 26 जून (आईएएनएस)। राम मंदिर के दान प्रकरण में 8 लोगों पर दर्ज एफआईआर को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने एसआईटी, सरकार और ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मामले में बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “अगर ‘छोटी मछलियों’ को पकड़ना था, तो पहले ही पकड़ लेते। एसआईटी क्यों बनाई गई थी? जब एसआईटी बनाई थी, तो उसकी रिपोर्ट पर अमल क्यों नहीं हुआ? अगर उसकी रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है, तो एफआईआर एसआईटी को करानी चाहिए थी। ऐसे अनेक सवाल हैं।”
उन्होंने कहा, “पूरा देश जानता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बड़े सख्त प्रशासक के रूप में काम करते हैं और उम्मीद थी कि इस मामले में भी वो सख्ती दिखाएंगे। लेकिन समझ नहीं आ रहा है कि इस मामले में सख्ती क्यों नहीं दिखा रहे हैं।”
राम मंदिर दान प्रकरण पर निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा, “जो राम को लाए हैं, वही राम को खा रहे हैं। इतने दिनों से चढ़ावे का गबन हो रहा था। इससे स्पष्ट है कि यह संगठित अपराध है। मामले में एफआईआर काफी देरी से हुई है और उसमें सभी बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की गई है।”
कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने कहा, “यह हैरानी की बात है कि राम मंदिर को भी लूटा जा रहा है, लेकिन ‘डबल-इंजन’ सरकार उन लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है जिन्होंने ऐसा किया है। जिस तरह कार्रवाई हो रही है, वह बहुत धीमी है और ऐसा लगता है कि कोई किसी को बचाना चाहता है। यहां तक कि एसआईटी पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसलिए, यह न सिर्फ एक धर्म के लोगों की भावनाओं को बल्कि उन सभी लोगों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचा रहा है जो हर धर्म का सम्मान करते हैं।”
राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीका राम जूली ने राम मंदिर चंदे में हेराफेरी के मामले में दर्ज एफआईआर पर कहा, “चंपत राय इस ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी हैं। उनकी देख-रेख में सारा काम हो रहा है, तो जिम्मेदारी तो उन्हीं पर आनी चाहिए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में कहीं न कहीं कुछ लोगों को बचाने का काम किया जा रहा है। जो असली चोर हैं, उन तक पहुंचा नहीं जा रहा। इससे पहले भी लाखों की जमीन को करोड़ों में ट्रस्ट के अंदर बेचा गया था, उसका भी आज तक कोई जवाब नहीं है।
टीका राम जूली ने कहा, “भगवान श्री राम को जो लोग नहीं बख्श रहे हैं, लोगों की आस्थाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं, ऐसे ही चंदा चोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यह लगभग 200 करोड़ रुपए के गबन का मामला है।”
समाजवादी पार्टी के नेता तेज नारायण पांडे ने कहा, “मामले में पहले दिन ही एफआईआर दर्ज हो जानी चाहिए थी। उसी दिन दर्ज हो जानी चाहिए थी जब अयोध्या के लोगों ने यह मुद्दा उठाना शुरू किया था।”
उन्होंने कहा, “मामले को सबसे पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि ‘राम मंदिर ट्रस्ट में गड़बड़ी और हेराफेरी हो रही है और 140 करोड़ लोगों की आस्था और भरोसे के साथ धोखा किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बना ट्रस्ट ही लोगों का भरोसा तोड़ रहा है।’ इन आठ लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई बहुत मामूली है। इसमें सिर्फ छोटी मछलियां ही फंसी हैं।”
सपा नेता ने कहा कि इस हेराफेरी के पीछे के मास्टरमाइंड और उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, जिनकी देखरेख और अगुवाई में यह सब कथित तौर पर सालों तक चलता रहा। तेज नारायण पांडे ने कहा कि एसआईटी, सरकार और ट्रस्ट ये सब मिले हुए हैं। पूरी एसआईटी और सरकार, ट्रस्ट के चरणों में लेटी हुई है।
उन्होंने कहा, “असली कार्रवाई तब मानी जाएगी, तब बड़ी मछलियों पर एफआईआर दर्ज होगी।” इसके साथ ही, सपा नेता ने सवाल किया कि जिन लोगों पर आरोप हैं, वे आखिर ट्रस्ट में क्यों बैठे हैं। वे इस्तीफा देकर ट्रस्ट से निकल क्यों नहीं रहे।
–आईएएनएस
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