राहुल गांधी का आचरण लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं, पुलिसकर्मियों पर हमला दुर्भाग्यपूर्ण: नरेश बंसल


नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। भाजपा सांसद नरेश बंसल ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के आचरण को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनका आचरण लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। इसके साथ ही, दिल्ली में 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, पुलिसकर्मियों पर हमले, वंदे मातरम विधेयक, ‘एक देश, एक चुनाव’ समेत कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन हिंसा और अराजकता किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती।

राहुल गांधी द्वारा यह कहे जाने पर कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जेनजी को धमकी नहीं दे सकते और उन्हें चुप नहीं करा सकते, नरेश बंसल ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि न प्रधानमंत्री मोदी ने और न ही गृह मंत्री अमित शाह ने किसी को धमकी दी है। यदि किसी में अहंकार दिखाई देता है तो वह राहुल गांधी हैं। राहुल गांधी छात्र आंदोलन के दौरान एक दिन भी वहां नहीं गए, लेकिन जब सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकलने की स्थिति बनी, तब वह अपने सांसदों के साथ प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए।

भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि ऐसा कदम लोकतांत्रिक इतिहास में अभूतपूर्व था और इससे प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ सकता था। बिना पूर्व सूचना और आवश्यक सुरक्षा इंतजामों के इस प्रकार का प्रदर्शन करना अनुचित था। राहुल गांधी का जमीन पर लेटना और विरोध का तरीका निंदनीय तथा लोकतांत्रिक गरिमा के अनुरूप नहीं था।

दिल्ली में 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन में पुलिसकर्मियों के घायल होने और उनके परिवारों द्वारा सार्वजनिक रूप से अपनी पीड़ा व्यक्त किए जाने पर नरेश बंसल ने इसे बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है। उनके अनुसार जब तक छात्र शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे, तब तक न लाठीचार्ज हुआ, न वॉटर कैनन का इस्तेमाल हुआ और न ही आंसू गैस छोड़ी गई। आंदोलन में असामाजिक तत्वों की घुसपैठ हुई, जिन्होंने हिंसा और पथराव कर पूरे आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि हालात बिगड़ने के बाद ही पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।

नरेश बंसल ने कहा कि उनके पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार पहले दिन प्रदर्शन में जितने लोग घायल हुए, उससे अधिक संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए थे। उन्होंने कहा कि कई पुलिसकर्मियों के सिर फूट गए और उनकी वर्दियां खून से लथपथ थीं। पुलिसकर्मियों के भी परिवार और बच्चे हैं, इसलिए उनके परिवारों में स्वाभाविक रूप से आक्रोश है। इस मामले को लेकर पीड़ित परिवारों ने अपनी बात सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष भी रखी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यायालय पूरे मामले का संज्ञान लेकर उचित कानूनी कार्रवाई के निर्देश देगा।

राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा लोकसभा अध्यक्ष से कार्रवाई की मांग किए जाने के सवाल पर नरेश बंसल ने कहा कि विशेषाधिकार नोटिस देना प्रत्येक सांसद का अधिकार है। यदि किसी सांसद को लगता है कि उसका विशेषाधिकार भंग हुआ है तो वह नोटिस दे सकता है। अब इस पूरे मामले पर निर्णय लेना लोकसभा अध्यक्ष का अधिकार है और उनका जो भी फैसला होगा, उसका सभी को सम्मान करना चाहिए।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में एक महिला के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रति इस प्रकार की भाषा और चित्रों का इस्तेमाल पूरी तरह अनुचित है। प्रधानमंत्री मोदी किसी व्यक्ति विशेष की कृपा से नहीं बल्कि 140 करोड़ देशवासियों के जनादेश से देश के प्रधानमंत्री बने हैं। पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है और वैश्विक स्तर पर भी उनकी लोकप्रियता बढ़ी है। किसी भी निर्वाचित प्रधानमंत्री के खिलाफ अशोभनीय और निम्न स्तर की टिप्पणियां लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध हैं। उन्होंने ऐसे कृत्यों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कानून के अनुसार उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

–आईएएनएस

पीएसके/एमएस


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