प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया सुभाषित, लिखा- जो पिंड या कण-कण में है, वहीं ब्रह्मांड में है


नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर गुरुवार को सुभाषित शेयर किया है। प्रधानमंत्री की ओर से ‘एक्स’ पोस्ट में संस्कृत श्लोक, “यश्चायमस्मिन्नाकाशे तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषः सर्वानुभूः। यश्चायमस्मिन्नात्मनि तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषः सर्वानुभूः॥” साझा किया गया, जिसका हिंदी अर्थ है कि विस्तृत आकाश या अंतरिक्ष में जो शक्तिमयी शाश्वत सत्ता है, वह हमारी आत्मा में भी है। इसलिए कहा भी गया है, जो पिंड या कण-कण में है, वहीं ब्रह्मांड में है।”

बीते दिन बुधावार को पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पोस्ट में संस्कृत श्लोक, “परकार्येषु युक्तात्मा स्वकार्ये क्षिप्रसाधनम्। सुहृत्कार्येषु निर्वृत्ती राजकार्येषु विक्रमः।” साझा किया था, जिसका हिंदी अर्थ है कि जो व्यक्ति दूसरों के कार्यों में पूरी निष्ठा से लगा रहता है, अपने व्यक्तिगत कार्यों को शीघ्रता एवं कुशलता से पूरा करता है, मित्रों के कार्यों को नि:स्वार्थ भाव से संपन्न करता है और राष्ट्र के कर्तव्यों में अपना पूर्ण पराक्रम व शौर्य प्रदर्शित करता है, वही श्रेष्ठ है।”

पीएम ने मंगलवार को भी सुभाषित शेयर किया था। उनकी ओर से सोशल मीडिया पर संस्कृत श्लोक ‘एकाग्रताथ सङ्कल्पः स्नायुवद्‌ वर्द्धनक्षमौ। नित्याभ्यासप्रयोगाभ्यामधिकाधिकमृध्यतः॥’ साझा किया गया था। इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि एकाग्रता और संकल्प हमारे स्नायुतंत्र की भांति है, जिन्हें नियमित अभ्यास और सही दिशा में प्रयत्न के माध्यम से निरंतर विकसित और सशक्त बनाया जा सकता है। समय के साथ ये दोनों और अधिक दृढ़ तथा प्रभावशाली बनते जाते हैं।”

सोमवार को पीएम मोदी ने सुभाषित पोस्ट शेयर करते हुए लिखा था, “आज हमारे युवा साथी धैर्य, आत्मविश्वास और अथक परिश्रम से ऐतिहासिक सफलता हासिल कर रहे हैं। यही विकसित हो रहे भारत की सबसे बड़ी ताकत है।”

पीएम मोदी ने संस्कृत श्लोक, “प्राप्यापदं न व्यथते कदाचिदुद्योगमन्विच्छति चाप्रमत्तः। दुःखं च काले सहते महात्मा धुरन्धरस्तस्य जिताः सपत्नाः॥” भी साझा किया था, जिसका हिंदी अर्थ है कि जो मनुष्य संकट के समय कभी विचलित नहीं होता, बल्कि धैर्य, कुशलता और सावधानी के साथ उससे बाहर निकलने का प्रयास करता है तथा समय आने पर दुखों को भी सहजता से सहन करता है। वह अंतत: कभी पराजित नहीं होता, बल्कि विपरीत परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त करता है।

–आईएएनएस

एसडी/वीसी


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