पीएम मोदी की यात्रा से सेमीकंडक्टर, टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी पर बढ़ेगा भारत-नीदरलैंड सहयोग : राजदूत कुमार तुहिन


नई द‍िल्‍ली, 15 मई (आईएएनएस)। नीदरलैंड में भारत के राजदूत कुमार तुहिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्‍होंने कहा क‍ि नीदरलैंड में नई सरकार बनने के बाद पहली उच्च-स्तरीय बातचीत है। हमें उम्मीद है कि इस स्तर पर दोनों देशों के नेता अलग-अलग क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। अब तक के अच्छे काम को आगे बढ़ाएंगे और रिश्तों को और मजबूत करने के लिए नई दिशा देंगे।

आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में राजदूत तुहिन ने बताया क‍ि भारत का नीदरलैंड के साथ संबंध काफी मजबूत है। हमारा सहयोग हेल्‍थ, ट्रेड, पानी और एग्रीकल्‍चर में काफी ज्‍यादा है। मैं यह उम्‍मीद करता हूं क‍ि इस यात्रा के बाद कुछ क्षेत्रों में हम यह तय कर पाएंगे क‍ि हमें अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के ल‍िए और क‍िन मुद्दों पर ध्‍यान देने की जरूरत है।

सेमीकंडक्टर को लेकर राजदूत तुहिन ने बताया क‍ि यह दोनों देशों के ल‍िए एक महत्‍वपूर्ण क्षेत्र है। भारत सरकार ने भी इस व‍िषय पर महत्‍वपूर्ण कदम उठाए हैं। कुछ ही समय पहले भारत में एआई सम‍िट का आयोजन हुआ था, उसमें नीदरलैंड के प्रधानमंत्री शाम‍िल हुए थे। उसके पहले भी भारत में सेमीकॉन की एग्‍जीबिशन हुई थी। उस दौरान भी नीदरलैंड की कई कंपन‍ियां भारत पहुंची थीं। इसको देखते हुए कह सकता हूं कि इस क्षेत्र में फोकस दोनों देशों के ल‍िए साथ म‍िलकर काम करने का एक बहुत अच्‍छा मौका है।

तुहिन ने कहा क‍ि भारत-नीदरलैंड साझेदारी व्यापार, तकनीक, सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बहुत अहम है। नीदरलैंड भारत के प्रमुख व्यापार साझेदारों में से एक है और यूरोप के लिए एक तरह का प्रवेश द्वार भी है। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता इस साल के अंत तक होने की उम्मीद है, ऐसे में नीदरलैंड की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।

उन्‍होंने कहा क‍ि इस यात्रा के दौरान बातचीत में नए टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और साफ-सुथरी ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर चर्चा होने की उम्मीद है, जहां कुछ ठोस प्रगति और नए सहयोग देखने को मिल सकते हैं।

उन्‍होंने कहा क‍ि जहां तक समझौतों या एमओयू की बात है, तो ऐसे उच्च-स्तरीय दौरों में आमतौर पर पूरे रिश्ते के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा होती है, जैसे व्यापार और निवेश, तकनीक, शिक्षा, समुद्री सहयोग और वैश्विक मुद्दे। अभी यह कहना मुश्किल है कि कौन-कौन से खास समझौते होंगे। यह दोनों नेताओं की बातचीत के नतीजों पर निर्भर करता है। निवेश की बात करें तो कई डच कंपनियां पहले से भारत में मौजूद हैं और भारतीय पेशेवर भी नीदरलैंड में काम कर रहे हैं। इससे सिर्फ निवेश बढ़ाने का ही नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट्स, क्षमता निर्माण और संस्थागत साझेदारी के लिए भी अवसर बनते हैं।

राजदूत ने कहा कि डच कंपनियां भारत के मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी के लक्ष्यों में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। दोनों देश पहले से ही इंटरनेशनल सोलर अलायंस और डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर गठबंधन जैसे मंचों पर साथ काम कर रहे हैं। इस मजबूत आधार को देखते हुए सहयोग को और बढ़ाने की काफी गुंजाइश है।

उन्‍होंने कहा क‍ि नीदरलैंड में रहने वाला भारतीय समुदाय भी दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने में बहुत अहम भूमिका निभाता है। यह यूरोप में सबसे बड़े भारतीय समुदायों में से एक है। यहां के लोग प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को लेकर काफी उत्‍साह‍ित हैं। यह लोग वहां के पेशेवर क्षेत्रों, स्थानीय अर्थव्यवस्था और राजनीति तक में सक्रिय हैं और भारतीय संस्कृति को भी आगे बढ़ाते हैं। साथ ही वे डच संस्कृति और विशेषज्ञता को भारत तक पहुंचाने में भी मदद करते हैं और दोनों देशों के बीच एक मजबूत सेतु की तरह काम करते हैं। शिक्षा और इनोवेशन भी सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। कई भारतीय और डच संस्थान पहले से ही एक-दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं।

–आईएएनएस

एवाई/एबीएम


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