जनता सर्वोपरि : एक प्राचीन आदर्श वाक्य से आधुनिक मूल्यों तक


बीजिंग, 20 जुलाई (आईएएनएस)। लंबे समय से, पश्चिमी देशों में आधुनिकीकरण के मार्ग ने विश्व के औद्योगीकरण और वैश्वीकरण को गति प्रदान की है, जिससे मानव सभ्यता के विकास में सकारात्मक योगदान मिला है और यह आधुनिकीकरण प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। इससे प्रभावित होकर, कई लोगों ने यह धारणा बना ली है कि आधुनिकीकरण का केवल एक ही पूर्वनिर्धारित मार्ग है – पश्चिमी मार्ग।

दरअसल, आधुनिकीकरण का कोई ऐसा निश्चित खाका कभी नहीं रहा है जो सभी देशों पर लागू हो। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने हजार साल पुरानी सभ्यता की जड़ों को विरासत में पाकर, अपनी स्थापना के बाद से एक सदी से अधिक के शासन अभ्यास से प्रेरणा लेकर और इसे देश की राष्ट्रीय परिस्थितियों के साथ मिलाकर, “जनता सर्वोपरि” की मूल मूल्य अवधारणा को परिष्कृत और आकार दिया है, जिससे “आधुनिकीकरण = पश्चिमीकरण” का संज्ञानात्मक मिथक टूट गया है।

नागरिकों को सर्वोपरि रखना, चीन की हजारों साल पुरानी शासन संस्कृति में निहित यह आधुनिक मूल्य, 1.4 अरब से अधिक लोगों के जीवन में आए परिवर्तन में परिलक्षित होने वाले परिणाम दे चुका है।

चीन ने कुछ ही दशकों में वह उपलब्धि हासिल कर ली है, जिसे विकसित देशों को लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने में सैकड़ों साल लग गए, जिससे सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बिजली, इंटरनेट और बुनियादी चिकित्सा देखभाल तक पहुंच मिल सकी।

इसकी सांस्कृतिक जड़ें हजारों वर्षों से चली आ रही प्राचीन कहावतों में छिपी हैं, इसके व्यावहारिक पदचिह्न उस पहाड़ी सड़क पर हैं, जिसने लगभग 10 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है, और इसका वैश्विक महत्व अधिक से अधिक देशों द्वारा देखा जा रहा है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

–आईएएनएस

एबीएम/


Show More
Back to top button