जनता को किया जा रहा गुमराह : मंत्री जगत सिंह नेगी


शिमला, 4 जून (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के मंत्री जगत सिंह नेगी ने एक प्रेस वार्ता में विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए पंचायती राज चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से हुए हैं और अब उनके परिणाम भी घोषित हो चुके हैं। चुनाव खत्म होने के बाद सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपना काम शुरू कर देना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद विपक्ष लगातार चुनावी नतीजों को लेकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने कहा कि यह चुनाव किसी पार्टी चिन्ह पर नहीं हुए थे, बल्कि खुले तरीके से कराए गए थे, इसलिए इन्हें किसी राजनीतिक मुकाबले या अंतिम चरण के रूप में पेश करना गलत है। पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर चुनाव अलग-अलग प्रकृति के होते हैं और इनमें कई जगहों पर व्यक्तिगत लोकप्रियता और स्थानीय समीकरणों का असर रहता है, इसलिए इन्हें किसी एक राजनीतिक दल की जीत या हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। नगर निकायों के चुनाव हुए हैं, जिनमें परिणाम सीमित हैं और सभी निकायों के पूरे चुनाव अभी बाकी हैं। ऐसे में इन्हें आधार बनाकर बड़े राजनीतिक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष इन सीमित परिणामों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है और इसे राजनीतिक बढ़त के रूप में दिखाने की कोशिश कर रहा है, जबकि वास्तविकता यह नहीं है। पंचायत स्तर पर कामकाज पूरी तरह सामूहिक निर्णय प्रक्रिया पर आधारित होता है। पंचायत प्रधान अकेले कोई निर्णय नहीं ले सकता है। वार्ड सदस्यों और अन्य प्रतिनिधियों की सहमति से ही विकास कार्य आगे बढ़ते हैं। इसी तरह पंचायत समितियों और जिला परिषदों में भी बहुमत के आधार पर निर्णय लिए जाते हैं। यह व्यवस्था किसी एक व्यक्ति या एक विचारधारा पर आधारित नहीं होती, बल्कि सामूहिक सहयोग से चलती है।

मंत्री ने विपक्ष पर यह भी आरोप लगाया कि जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के राजनीतिक विमर्श को बढ़ाया जा रहा है। आज आम जनता महंगाई, रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि, रोजगार और अन्य आर्थिक समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन विपक्ष इन मुद्दों पर बात करने के बजाय केवल चुनावी नतीजों को मुद्दा बनाया जा रहा है। केंद्र सरकार की नीतियों के कारण कई कल्याणकारी योजनाओं की स्थिति प्रभावित हुई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों पर भी असर पड़ा है।

उन्होंने मनरेगा योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी थी, लेकिन अब इसमें कई बदलाव कर दिए गए हैं, जिससे लोगों को पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट और फंडिंग में कमी के कारण पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में बाधाएं आ रही हैं। लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन उसे जिम्मेदारी के साथ रखा जाना चाहिए।

–आईएएनएस

एसएचके/एबीएम


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