जिरांग: ओडिशा के जंगलों में छिपा है मिनी भूटान, अध्यात्म और प्रकृति दोनों का अनोखा संगम


नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। गर्मियों की छुट्टियों के आते ही स्थान और प्रकृति से भरे स्थल अपनी तरफ खींचने लगते हैं। कुछ लोग देश से बाहर का वेकेशन प्लान करते हैं, लेकिन भारत में कई ऐसे हिडन प्लेसेस हैं, जहां का नजारा विदेशों में बने पर्यटन स्थलों से भी कहीं ज्यादा बेहतर है।

आज हम ओडिशा के जंगलों में बसे मिनी भूटान के बारे में बताएंगे, जहां का माहौल और खानपान भूटान के कल्चर की याद दिला देगा।

ओडिशा के गजपति जिले के पास जिरांग और उससे सटे चंद्रगिरी गांव में तिब्बत की संस्कृति का अनोखा नजारा देखने को मिल जाएगा। साल 1959 में तिब्बत पर चीन द्वारा आक्रमण के बाद इसी जगह पर तिब्बती प्रवासियों को आश्रय दिया गया था। तिब्बतियों का पहला समूह 1 मई 1963 को चंद्रगिरी पहुंचा और तब से वे पूर्वी घाट के इन सुरम्य पहाड़ों में बसे हुए हैं। तिब्बतियों ने इस स्थान को “फुंटसोक्लिंग” नाम दिया है, जिसका अर्थ है समृद्धि और सुख की भूमि।

यहां का प्रमुख आकर्षण पद्मसंभव महाविहार मठ है, जिसका उद्घाटन दलाई लामा ने 2010 में किया था। जंगलों के बीचों बीच होने की वजह से यहां अध्यात्म और प्रकृति दोनों का अनोखा नजारा देखने को मिल जाता है। यहां पद्मसंभव महाविहार में शांति और सुकून से भरा माहौल रहता है और ध्यान और ज्ञान को आत्मसार करने के लिए इस से बेहतर जगह कोई और नहीं हो सकती।

पद्मसंभव महाविहार बहुत बड़ा और कई स्तूपों से मिलकर बनाया गया मठ है। मठ को प्राचीन पारंपरिक तिब्बती स्थापत्य शैली के साथ बनाया गया है। मठ के प्रार्थना स्थल में बेहतरीन नक्काशी और कई देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को उकेरा गया है। खास बात यह है कि मठ के भीतर एक लाइब्रेरी का भी निर्माण किया गया है, जहां प्राचीन बौद्ध धर्मग्रंथों को संजोकर रखा गया है।

हर साल यहां बौद्ध धर्म को करीब से जानने के लिए विदेशों से भी पर्यटक आते हैं। मठ के कुछ ही दूरी पर जगन्नाथ मंदिर और मां कुरैसुनी मंदिर भी मौजूद हैं। अगर आप कुछ समय के लिए शांति और सुकून की यात्रा करना चाहते हैं तो जिरांग जरूर जाएं। यहां आपको पारंपरिक तिब्बती खाने का भी स्वाद चखने को मिलेगा। मठ के मोमोज, तिब्बती नूडल सूप (जो मांस को मिलाकर बनाया जाता है) और तुकपा काफी फेमस है।

–आईएएनएस

पीएस/वीसी


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