दिल्ली स्कूल बम धमकी मामले पर बोले मालवीय, राजनीतिक नेतृत्व ही सुरक्षा एजेंसियों को मजबूत बनाता है

दिल्ली स्कूल बम धमकी मामले पर बोले मालवीय, राजनीतिक नेतृत्व ही सुरक्षा एजेंसियों को मजबूत बनाता है

नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। भाजपा आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने दिल्ली स्कूल बम धमकी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्हें यकीन है कि हमारी सुरक्षा एजेंसियों को हमें सुरक्षित रखने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है। लेकिन इससे भी अधिक यह राजनीतिक नेतृत्व है, जो उन्हें (सुरक्षा एजेंसियों को) सशक्त बनाता है।

मालवीय ने मोदी सरकार के पिछले 10 वर्षों के कार्यकाल को देश के लिए शांतिपूर्ण काल बताते हुए देश में जारी लोकसभा चुनाव के बारे में भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि हमें फिर से एक विकल्प चुनना है और इस बार इसे हमारी कलेक्टिव सेफ्टी और सिक्योरिटी के लिए होने देना चाहिए।

मालवीय ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “आज सुबह, मेरी बेटी उसे विदा करने के 45 मिनट बाद घर वापस आ गई। उसके स्कूल की घेराबंदी कर दी गई थी और बस को प्रवेश की अनुमति नहीं थी, क्योंकि जाहिर तौर पर बम होने का खतरा था। टीवी पर अपने स्कूल के दृश्यों को देखते समय वह चिंतित और उत्सुक दोनों थी। मैं अपनी भावनाओं को छुपाते हुए उसकी भावनाओं का मंथन करता रहा। आतंक का साया अब हमारे बच्चों के स्कूल तक पहुंच गया था, कम से कम एक ई-मेल तो आया था। आतंक से मेरा गहरा नाता रहा है। एक बच्चे के रूप में कश्मीर में और एक वयस्क के रूप में मुंबई में। मेरे मित्र और परिचित हैं, जो 26/11 और मुंबई लोकल में हुए बम विस्फोटों में बच गए। मैंने उन्हें टूटे हुए और जीवन के लिए डरे हुए, टुकड़ों को इकट्ठा करते हुए, अपने जीवन का पुनर्निर्माण करते हुए देखा है। कई अन्य लोग इतने भाग्यशाली नहीं थे, जिन्हें बाद में अपने प्रियजनों के निर्जीव शरीरों का बोझ उठाना पड़ा।”

मालवीय ने आगे कहा कि ये सारे विचार उनके दिमाग में घूम रहे थे, जब वह अपनी बेटी के सवालों में उलझ गए थे कि यह धमकी वाला मेल किसने भेजा होगा ? उसका मकसद और क्या होता, अगर स्कूल में वास्तव में कोई बम होता जैसे कई सवाल। उन्होंने आगे कहा कि उनकी बेटी के स्कूल ग्रुप में साजिश के सिद्धांतों की चर्चा थी और वह उनसे उन्हें वेलीडेट करने के लिए कहती रही। भाजपा नेता ने आगे कहा, “बाद में जब मैं आज शाम घर लौटा, तो उसने जोर देकर कहा कि मैं मेल का टेक्स्ट पढ़ूं। उसे लगा कि यह डरावना है और वह जानना चाहती थी कि मुझे इसके बारे में क्या कहना है। उसके पास भी बहुत सारे सवाल थे। एक पिता के रूप में मुझे केवल इस बात की राहत महसूस हो रही थी कि आज का दिन बिना किसी घटना के बीत गया।”

उन्होंने आगे कहा कि “पिछला दशक काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा है और कोई बड़ा आतंकवादी हमला नहीं हुआ है, जो कि यूपीए के तहत नॉर्मल सी बात हो गई थी। मुझे यकीन है कि हमारी सुरक्षा एजेंसियों को हमें सुरक्षित रखने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है। लेकिन इससे भी अधिक यह राजनीतिक नेतृत्व है, जो उन्हें सशक्त बनाता है। हमें फिर से एक विकल्प चुनना है और इस बार इसे हमारी कलेक्टिव सेफ्टी और सिक्योरिटी के लिए होने देना चाहिए।”

–आईएएनएस

एसटीपी/एसजीके

E-Magazine