एपीडी डिसऑर्डर से जूझने वाले आदित्य चोपड़ा ने कैसे रचा सफलता का इतिहास, 23 वर्ष की उम्र में दी सुपरहिट फिल्म


मुंबई, 20 मई (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा के मशहूर निर्देशक आदित्य चोपड़ा ने न सिर्फ रोमांस को नए अंदाज में बड़े पर्दे पर पेश किया, बल्कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को कई नए सितारे और नई सोच भी दी। वह हमेशा लाइमलाइट से दूर रहे, लेकिन उनकी बनाई फिल्मों ने करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनाई। बहुत कम लोग जानते हैं कि बचपन में आदित्य एक ऐसी समस्या से जूझ रहे थे, जिसमें आवाजों को समझने में दिक्कत होती थी। इसके बावजूद, उन्होंने खुद को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया और मेहनत के दम पर हिंदी सिनेमा के सबसे सफल निर्माताओं में अपनी जगह बनाई।

आदित्य चोपड़ा का जन्म 21 मई 1971 को मुंबई में हुआ था। वह मशहूर फिल्म निर्माता यश चोपड़ा और पामेला चोपड़ा के बड़े बेटे हैं। उनके छोटे भाई उदय चोपड़ा भी फिल्मों से जुड़े रहे। बचपन से ही आदित्य को फिल्मों वाला माहौल मिला। घर में फिल्मों की बातें, शूटिंग और कलाकारों का आना-जाना लगा रहता था।

बचपन और किशोरावस्था में आदित्य एपीडी (ऑडिटरी प्रोसेसिंग डिसऑर्डर) से जूझ चुके हैं। इस समस्या में इंसान को आवाजें साफ सुनाई तो देती हैं, लेकिन दिमाग उन्हें ठीक तरह से समझ नहीं पाता। कई बार आसपास की अलग-अलग आवाजों को पहचानना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति किसी भी बच्चे के आत्मविश्वास को कमजोर कर सकती है, लेकिन आदित्य ने इस परेशानी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने खुद को फिल्मों और कहानियों की दुनिया में व्यस्त रखा और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई।

सिर्फ 18 साल की उम्र में आदित्य चोपड़ा ने अपने पिता के साथ सहायक निर्देशक के रूप में काम शुरू कर दिया था। उन्होंने ‘चांदनी’, ‘लम्हे’ और ‘डर’ जैसी फिल्मों में यश चोपड़ा को असिस्ट किया। इसी दौरान उन्होंने फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखीं। वह कहानियों को लेकर बेहद गंभीर रहते थे और छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देते थे।

आदित्य चोपड़ा ने केवल 23 साल की उम्र में ‘दिलवाले दुल्हिनयां ले जाएंगे’ का निर्देशन किया। इस फिल्म में शाहरुख खान और काजोल लीड रोल में थे। यह फिल्म हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी रोमांटिक फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई की और आज भी लोगों की पसंदीदा फिल्म है। इस फिल्म के लिए आदित्य चोपड़ा को फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार मिला। फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

इसके बाद आदित्य ने ‘मोहब्बतें’, ‘रब ने बना दी जोड़ी’ और ‘बेफिक्रे’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। वहीं, निर्माता के रूप में उन्होंने ‘धूम’, ‘वीर-जारा’, ‘चक दे! इंडिया’, ‘एक था टाइगर’, ‘वॉर’ और ‘पठान’ जैसी बड़ी फिल्मों को प्रोड्यूस किया। उन्होंने यश राज फिल्म्स को देश की सबसे बड़ी फिल्म कंपनियों में बदल दिया।

आदित्य चोपड़ा ने कई नए कलाकारों को फिल्मों में मौका दिया। अनुष्का शर्मा, रणवीर सिंह, परिणीति चोपड़ा, अर्जुन कपूर और भूमि पेडनेकर जैसे कलाकारों के करियर की शुरुआत में उनका बड़ा योगदान रहा।

अगर निजी जिंदगी की बात करें तो आदित्य चोपड़ा की पहली शादी पायल खन्ना से हुई थी, लेकिन बाद में दोनों का तलाक हो गया। इसके बाद उन्होंने अभिनेत्री रानी मुखर्जी से साल 2014 में शादी की। दोनों की एक बेटी आदिरा है। आदित्य अपनी निजी जिंदगी को हमेशा मीडिया से दूर रखते हैं।

आज आदित्य चोपड़ा हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े और प्रभावशाली फिल्ममेकर्स में गिने जाते हैं। उनके पिता यश चोपड़ा का साल 2012 में निधन हो गया था, लेकिन आदित्य ने उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए यशराज फिल्म्स को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

–आईएएनएस

पीके/एबीएम


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